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हिंदू लड़कियों की जबरन शादी मामले में नया मोड़

 

 

सुलक्षणी

पाकिस्तान में कुछ हिंदू लड़कियों की जबरन शादी के मामले ने उस समय एक नया मोड़ ले लिया, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मजिस्ट्रेट के सामने अपने दर्ज बयान में इन लड़कियों ने अपने पतियों के साथ रहने की इच्छा जताई.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद ये कहा था कि तीनों लड़कियाँ अब आजाद हैं और अपने भविष्य का फैसला खुद कर सकती हैं, इसलिए पुलिस उन्हें सुरक्षा प्रदान करे.

लड़कियों के माता पिता ने अपनी बेटियों से अदालत में मिलने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी. उसके बाद अदालत ने तीनों लड़कियों को बंद कमरे में बयान रिकॉर्ड करने का आदेश दिया.

जैकबाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गुलाम अहमद आवाण ने अदालत के बाहर पत्रकारों को बताया कि तीनों लड़कियों ने अपने बयान में अपने पतियों के साथ रहने की इच्छा जताई है.

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आरोप

इस बीच इन हिंदू लड़कियों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके साथ भेदभाव किया और उन्हें उनकी बेटियों से मिलने की अनुमति नहीं मिली.

मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने मंगलवार को सिंध प्रांत में हिंदू लड़कियों के अपहरण और उनकी जबरन शादी के मामले में पाकिस्तानी हिंदू परिषद की याचिका पर सुनवाई की.

सिंध के जिले घोटकी की निवासी रिंकल कुमारी और जैकबाबाद की डॉ. लता और आशा कुमारी को अदालत के समक्ष पेश किया गया.

जब महिला पुलिसकर्मी रिंकल कुमारी का हाथ पकड़ कर अदालत में पेश कर रही थी तो मुख्य न्यायधीश ने उनको फटकार लगाई और कहा कि रिंकल कुमारी का हाथ क्यों पकड़ा है? वे अभियुक्त थोड़ी हैं.

“हिंदुओं के साथ इतना जुल्म क्यों हो रहा है? हमारी नौजवान लड़कियों को अगवा किया जा रहा है. अगर मुसलमानों को अपनी औलाद प्यारी है तो हम हिंदुओं को भी प्यारी है. अगर आप हिंदुओं को इस मुल्क से निकालना चाहते हैं तो सीधी तरह कहें, हमारी लड़कियों को अगवा क्यों करते हो”

सुलक्षणी

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लड़कियों की माताएँ अपनी बेटियों से मिलने के लिए बेताब थी और अदालत के बाहर और अंदर पत्रकारों और लोगों की भीड़ में अकेली रोती रहीं.

घोटकी की निवासी रिंकल कुमारी की माता सुलक्षणी ने बीबीसी से बातचीत करते हुए सवाल उठाया कि आखिर पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ जुल्म और अन्याय क्यों हो रहा है.

उन्होंने कहा, “हिंदुओं के साथ इतना जुल्म क्यों हो रहा है? हमारी नौजवान लड़कियों को अगवा किया जा रहा है. अगर मुसलमानों को अपनी औलाद प्यारी है तो हम हिंदुओं को भी प्यारी है. अगर आप हिंदुओं को इस मुल्क से निकालना चाहते हैं तो सीधी तरह कहें, हमारी लड़कियों को अगवा क्यों करते हो.”

लड़कियों के माता पिता ने अदालती फैसले पर निराशा जताई और कहा कि वह बड़ी उम्मीद ले कर सुप्रीम कोर्ट आए थे लेकिन यहाँ भी उनको इंसाफ नहीं मिला और उनकी बेटियों से मिलने भी नहीं दिया गया.

जैकबाबाद की निवासी आशा कुमारी के पिता मोहन ने बताया कि अदालत में उनके साथ भेदभाव किया गया.

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निराशा

मोहनआशा के पिता मोहन का आरोप है कि अदालत ने भेदभाव किया है

उन्होंने कहा, “अदालत ने हमें एक मिनट के लिए भी हमारी बेटी से मिलने नहीं दिया जबकि जिन लोगों ने हमारी बेटी को अगवा किया और जबरदस्ती मुसलमान बनाया तो उनसे मिलने दिया गया.”

हिंदू समुदाय ने अदालती फैसले पर निराशा जताई और लड़कियों के माता पिता के साथ कुछ सांसद ने विरोध प्रदर्शन किया और सुप्रीम कोर्ट के सामने वाले मुख्य मार्ग पर धरना दिया.

उस समय तीनों लड़कियों की माताएँ संसद के निकट बीच सकड़ पर बैठ कर चीखती-चिल्लाती रहीं, लेकिन कोई मंत्री या सरकारी अधिकारी उनके पास नहीं पहुँचा.

हिंदू समुदाय और लड़कियों के परिजनों ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल पीपुल्स पार्टी के सांसद मियाँ मिट्ठो ने उनकी लड़कियों को अगवा करवाया और उन्हें मुसलमान बनाकर उनकी जबरन शादी करवा दी. लेकिन मियाँ मिट्ठो ने इन तमाम आरोपों का खंडन किया.

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