मोर्चा व गठबंधन से विमर्श किए बगैर उपेन्द्र जी चुनाव में शामिल हुए : नीलम वर्मा
नीलम वर्मा,काठमांडू , १३ मई | राज्य द्वारा सदियों से शोषण, उत्पीड़न, वंचन एवं विभेदीकरण में रहे मधेशी, जनजाति, दलित, अल्पसंख्यक, मुसलिम मुदायों की चाहत थी कि नेपाल के संविधान में हमारा अधिकार लिपिबद्ध हो । दो–दो बार संविधानसभा का चुनाव भी हुआ । लेकिन नस्लवादी चिन्तन के लोग इन समुदायों की मांगों को दरकिनार कर जबरन संविधान जारी किया । संविधान के विरुद्ध में मौजूदा संविधान को जलाया गया, तीन–तीन बार आंदोलन भी हुए । आंदोलन के दौरान एक सौ चौविस मधेशी सपूतों की हत्या कर दी गई । इतना होने के बावजूद भी संविधान संशोधन नहीं किया । और चुनाव की तारीख घोषित कर दी गई ।
चुनाव लोकतंत्र का मेरुदंड है । लोकतंत्र में आस्था व विश्वास रखने वालों के लिए चुनाव आवश्यक है । हमारी पार्टी राजपा नेपाल लोकतांत्रिक पार्टी होने की वजह से चुनाव चाहती है । मधेशी जनता भी चुनाव चाहती हैं । लेकिन हमारी मांगों को दरकिनार कर सरकार चुनाव करवा रही है । यहां तक कि प्रथम चरण कें चुनाव में शामिल होने से हमें वंचित भी कर दिया गया । दूसरे चरण के चुनाव से पूर्व हमारी मांगें पूरी किए बगैर चुनाव करवाया जाता हैं तो हम चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे । यहां तक कि चुनाव होने भी नहीं देंगे ।
कुछ दिन पूर्व संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के अध्यक्ष तथा संघीय गठबंधन के संयोजक उपेन्द्र यादव ने नयी शक्ति पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव में शामिल होने की घोषणा की थी और वे चुनाव में शामिल भी हुए । गैरतलब बात ये है कि वे संघीय गठबंधन के संयोजक होते हुए भी उन्हें गठबंधन व मोर्चा से विमर्श करना चाहिए था, अपनी बात रखनी चाहिए थी । लेकिन कुछ भी नहीं बोले । कभी कभार मिटिंग के दौरान उपेन्द्र जी हम लोग कहते थे कि आप चुनाव के विरुद्ध में हैं फिर भी आपके कार्यकर्ता जिला स्तर पर चुनाव में शामिल होने के लिए दल दर्ता भी कर रहे हैं । वे कहते थे कि नहीं गलती हो गई, ऐसी कुछ बात नहीं है । इससे स्पष्ट होता है कि उनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर है । आखिरकार मोर्चा व गठबंधन से विमर्श किए बगैर वे चुनाव में शामिल हो ही गए ।
(निलम वर्मा, राजपा नेपाल की नेत्री हैं ।)


