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रमजान खुदा की इबादत का तरीका

 

२१ मई

रमजान के पाक महीने में रोजा रखना खुदा की इबादत का तरीका है। लेकिन सिर्फ भूखा रहनेभर से रोजा नहीं हो जाता है। रोजे का मतलब होता है अपनी आदतों और इंद्रियों पर नियंत्रण रखना। बुरी चीजों से दूर रहना। एक बात का खास ध्यान रखें कि अपने बंदों को परेशानी में देखकर अल्लाह कभी खुश नहीं होते हैं। इसलिए रोज़े के दौरान यदि किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

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खुद पर संयम रखना, रोज़ेदार की प्राथमिकता होनी चाहिए। यह संयम केवल स्वाद का नहीं होता है। मतलब केवल खाना छोड़ देना ही संयम नहीं है। आपको संयम रखना है होता है, हर बुरी चीज़ पर। किसी के प्रति गलत न बोलें, किसी के साथ गलत होता हुआ न देखें और किसी के प्रति गलत सोचें भी नहीं। वैसे तो हमें कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए लेकिन रमाज़ान के पाक महीने में यदि रोज़ेदार झूठ बोलता है तो उसका रोज़ा टूटा हुआ माना जाता है।

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रोजे के दौरान पीठ पीछे किसी की बुराई करना, झूठी कसम खाना, लालच करना या कोई भी गलत काम करता है तो उसका रोजा टूटा हुआ माना जाता है। रमज़ान में मन का शुद्धिकरण बेहद जरूरी है। यह बेहद पवित्र महीना है। इसी महीने में पवित्र कुरआन को धरती पर उतारा गया। रोज़े रखने की परंपरा के बारे में धार्मिक आस्था है कि रमज़ान के रोजे हिजरत पैगंबर मोहम्मद साहब के मक्का से मदीना जाने की घटना के दूसरे वर्ष अनिवार्य किए गए।

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