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मालदीव और बिआरआई प्रोजेक्ट्स : अनिल तिवारी

 

अनिल तिवारी,हिमालिनी, अंक फेब्रुअरी 2019 | इब्राहिम मोहम्मद सोलीह ने अब्दुल्ला यामीन के विवादास्पद कार्यकाल (जिसमें विपक्ष और आलोचकों के खिलाफ सत्तावादी उत्पीड़न देखा था) की समाप्ति के बाद, नवंबर, २०१८ में मालदीव के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली । नए राष्ट्रपति के सामने कई चुनौतियां हैं और उनमें से प्रमुख १.४ बिलियन अमरीकी डालर से अधिक का विनाशकारी चीनी ऋण है, जिसका खामियाजा मालदीव की अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है ।
यह इतना बड़ा ऋण है कि मालदीव की जीडीपी के ज्ञरघचम के बराबर है और उस ऋण में से भी ७५ प्रतिशत तो सिर्फ बीआरआई परियोजनाओं के अन्तर्गत लिया गया है । वाशिंगटन स्थित एक प्रसिद्ध थिंक÷टैंक स्वीकार करता है कि बीआरआई ऋणों के कारण मालदीव की अर्थव्यवस्था भारी जोखिम में है और यह भी दावा करते है कि मालदीव उन देशों के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है जो बीआरआई परियोजनाओं के लिए अपनी स्वीकृति देके अपने देश की अर्थ्व्यस्था को भारी संकट में डाल दिया है ।
माले हल्हमाले ब्रिज ः
यह ब्रिज मालदीव की राजधानी को पास के द्वीप से जोड़ेगा । यह ब्रिज चीन द्वारा २०० मिलियन अमरीकी डालर की लागत से संदिग्ध बीआरआई परियोजना के अंतर्गत बनाया जा रहा है । इस ब्रिज के निर्माण पर अविवेकी और लापरवाह निवेश को लेकर मालदीव के शास्त्रीय और सिविल सोसाइटी समूह ने हाल ही में अपनी निराशा व्यक्त की है । उनका कहना है कि सरकार को अभी देश को आवास, अस्पतालों और स्वास्थ्य, पानी और सीवेज जैसी आधारभूत सुविधाओं पर निवेश करना चाहिए, नाकी बीआरआई जैसे परियोजाओं पर ।
मालदीवियों ने इस आर्थिक तबाही का दोष यामीन के राष्ट्रपति पर लगाया है, जिन्होंने अपने छोटे राष्ट्र के फाटक को चीनी के लिए बिना किसी विचार विमर्श के खोल दिया था । मालदीव के कुछ अर्थशास्त्रियों ने तो आलोचना करते हुए यहां तक के दिया कि यामीन ने तो अपने देश को ही चीनियों के पास गिरवी रख दिया है ।
चीन द्वारा छोटे देशों के परियोजनाओं को अप्रभावी लागत पर अधिग्रहण किया जा रहा है । चीन शुरू से ही बीआरआई के द्वारा छोटे दक्षिण एशियाई राष्ट्रों में अप्रभावी लागत पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बनाने की बात कर रहा है। परन्तु, जैसे ही कोई राष्ट्र ऋण का भुगतान करने में अपनी असमर्थता व्यक्त करता हैं, वैसे ही चीनी शर्तों को निर्धारित करना शुरू कर देते हैं और जिसको ना चाहते हुए भी, छोटे देशों को मानना पड़ता है । यह बात अब किसी से छुपी नहीं है कि छोटे देशों पर अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए चीन कथित तौर पर उच्च अधिकारियों और राजनेताओं को पैसों को लालच देता है । चीन के इस पैटर्न को प्रमाणित करने के लिए, मालदीव के अखबारों ने हाल ही में एक उदाहरण दिया है जिसमें उनके देश में एक अस्पताल निर्माण करने के लिए चीन को १०० मिलियन ग्क्म् से भी अधिक का टेंडर दे दिया गया, जबकि प्रतिस्पर्धा कंपनी इसी काम के लिए लगभग ५० मिलियन अमरीकी डालर का टेंडर भारी थी । उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व प्रेसीडेंट यामीन को अपने चुनाव अभियान की फंडिंग के लिए बीजिंग से १ मिलियन अमरीकी डालर से अधिक की राशि मिली थी ।
मालदीव ने ५० वर्षों के लिए अपना एक पूरा द्वीप पट्टे पर चीन को दे दिया है । पूर्व प्रेसीडेंट यामीन के कार्यकाल के दौरान, उन्होंने एक निर्जन द्वीप ँभथमजयय ँष्लयजिग को चीन को ५० साल के पट्टे पर दे दिया है, केवल ४ मिलियन अमरीकी डालर के लिए । इसी तरह श्रीलंका में भी चीन ने हंबनटोटा बंदरगाह का अधिग्रहण कर लिया है । अब पूरे विश्व के विशेषज्ञ लगातार इस मुददे को उठा रहे है कि विश्व के सारे छोटे और बड़े राष्ट्रों को हंबनटोटा(एपिसोड से सीख लेना चाहिए और अपने देश की अर्थव्यवस्थाओं को चीन के ऋण जाल में फसने से रोकना चाहिए ।
एक बार जब चीनी को यह पता चल गया कि लोगों का जनादेश अब्दुल्ला यामीन के पास नहीं है, तो चीन ने कथित तौर पर यामीन को चुनाव परिणामों को स्वीकार न करने का हुक्म दिया । हालाँकि ऐसा नहीं हुआ और अब चीनी, मालदीव और हिंद महासागर क्षेत्र के स्थिरीकरण और सुरक्षा के लिए भारत से सहयोग चाहते हैं । पूर्व राष्ट्रपति नशीद, जो कि यामीन के शासन में स्व–निवासित थे, अब राष्ट्रपति के सलाहकार के रूप में नियुक्त किए गए हैं । उन्होंने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि मालदीव चीन के साथ हो रहे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट(एफटीए) को खत्म कर देगा ।
इसी बीच ईब्राहिम सोलीह ने आपसी सम्मान और मित्रता पर आधारित संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भारत की अपनी पहली विदेश यात्रा की । अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने बताया “भारत न केवल हमारा सबसे करीबी दोस्त है, यह हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है । भारत ने भी द्वीप के लिए मदद का हाथ बढ़ाते हुए मालदीव को बजटीय सहायता और मुद्रा विनिमय के रूप में १.४ बिलियन अमरीकी डालर की वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव किया है ।

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