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hindi sahitya in nepal

प्रत्येक साहित्यकार अपने देश के अतीत से प्राप्त विरासत पर गर्व करता है : श्वेता दीप्ति

 

साहित्यसङ्गीतकलाविहीनः साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः हिमालिनी, अंक डिसेम्वर 2018, (सम्पादकीय ) भर्तृहरि नीतिशतक में कहा गया है