सिद्धांतहीन और स्वार्थप्रेरित गठबंधन का दीर्घकालीन औचित्य नहीं हो सकता : रामकिशोर सिंह
काठमांडू, 4 अगस्त। गोरखापत्र संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष रामकिशोर सिंह ने कहा है कि नेपाल में बार-बार बनने वाले राजनीतिक गठबंधन जनता के हित के बजाय नेताओं के व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति का माध्यम बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धांत, नीति और विचार के बजाय सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से होने वाले ऐसे गठजोड़ लोकतांत्रिक मूल्यों और सुशासन को कमजोर कर रहे हैं।
सिंह के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक दलों के बीच बने गठबंधन किसी साझा नीति या वैचारिक आधार पर नहीं, बल्कि सत्ता समीकरण को ध्यान में रखकर किए गए हैं। उन्होंने कहा, “नेताओं के बीच होने वाले ऐसे अप्राकृतिक गठबंधन जनता के प्रति जवाबदेह नहीं दिखते। इससे सरकार की सेवा-प्रवाह क्षमता कमजोर होती है और जनता में निराशा बढ़ती है।”
उन्होंने कहा कि स्वार्थ आधारित गठबंधन के कारण सुशासन, भ्रष्टाचार नियंत्रण और विकास निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे लगातार पीछे छूट रहे हैं। उनके अनुसार, केवल सत्ता में बने रहने के लिए किए जाने वाले गठजोड़ से न तो भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण हो सकता है और न ही देश में दीर्घकालीन सुशासन स्थापित किया जा सकता है।
सिंह ने नेताओं के व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों को गठबंधन राजनीति के विकृत होते स्वरूप का एक प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि इससे राजनीतिक व्यवस्था के प्रति आम नागरिकों का विश्वास कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार बदलते सत्ता समीकरणों का असर नीति निर्माण और दीर्घकालीन विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि देश के विकास और समृद्धि के लिए स्थिर, जवाबदेह और स्पष्ट नीतियों के आधार पर चलने वाली सरकार आवश्यक है। लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में सत्ता समीकरण ही राजनीति का मुख्य केंद्र बन गया है।
“विकास के मुद्दे पीछे छूट गए हैं और सत्ता समीकरण ही मुख्य विषय बन गया है,” सिंह ने कहा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्वार्थ आधारित गठबंधन और सत्ता-केंद्रित राजनीति का यह सिलसिला जारी रहा तो नेपाल और अधिक गंभीर राजनीतिक अस्थिरता एवं अन्योल की स्थिति में फंस सकता है। उन्होंने राजनीतिक दलों से व्यक्तिगत और दलगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित तथा जनहित को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
सिंह ने कहा कि सिद्धांतहीन और स्वार्थप्रेरित गठबंधन का दीर्घकालीन औचित्य नहीं हो सकता। ऐसी राजनीति अंततः लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के साथ ही जनता का राजनीतिक दलों और नेताओं के प्रति विश्वास भी समाप्त कर सकती है।यदि चाहें तो इसे हिमालिनी ऑनलाइन की शैली में और अधिक धारदार राजनीतिक विश्लेषणात्मक समाचार के रूप में भी तैयार किया जा सकता है।


