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प्रचण्ड सहित शीर्ष ६ नेताओं की भेला भैंसेपाटी में, प्रधानमन्त्री परिवर्तन की चर्चा !

 

काठमांडू, २४ अप्रील । नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के ६ शीर्ष नेताओं की भेला भैंसेपार्टी में संपन्न हुआ है । पार्टी अध्यक्ष प्रचण्ड सहित शीर्ष ६ नेताओं की बैठक में प्रधानमन्त्री भी रहे दूसरे पार्टी अध्यक्ष केपीशर्मा ओली की सहभागिता नहीं है । गत सोमबारी जारी दो अध्यादेश के कारण विकसित राजनीतिक घटनाक्रम को मध्यनजर करते हुए बैठक आयोजित रहा है ।
पार्टी उपाध्यक्ष वामदेव गौतम निवासी में आयोजित बैठक में नेकपा के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व प्रधानमन्त्री द्वय झलनाथ खनाल, माधवकुमार नेपाल, पार्टी उपाध्यक्ष वामदेव गौतम, महासचिव विष्णु पौडेल, पार्टी प्रवक्ता नारायणकाजी श्रेष्ठ सहभागी थे, बैठक ने निर्णय किया है कि सरकार द्वारा जारी अध्यादेश समय–सान्दर्भिक नहीं है, उसको वापस करना ही सरकार और पार्टी के हित में है । इसके लिए सरकार से आग्रह करने का निर्णय भी हुआ है ।
स्मरणीय है, गत सोमबार प्रधानमन्त्री ओली के सिफारिश में राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी ने राजनीतिक दल विभाजन और संवैधानिक परिषद् संबंधी दो अध्यादेश जारी हुई थी, उक्त अध्यादेश के कारण समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) आपस में एकीकरण के लिए बाध्य हो गए । उक्त घटना के कारण नेकपा विशेषतः प्रधानमन्त्री ओली को राजनीतिक वृत्त में आलोचना का शिकार होना पड़ा । आज नेकपा के अन्दर से ही प्रधानमन्त्री ओली को पद से इस्तिफा देने के लिए सुझाव आ रहा है ।
नेकपा संबंद्ध असंख्य कार्यकर्ताओं ने सामाजिक संजाल में प्रधानमन्त्री ओली को पद से इस्तिफा देने के लिए कहा है । नेकपा के अलवा अन्य राजनीतिक पार्टि से आबद्ध राजनीतिककर्मियों का भी कहना है कि प्रधानमन्त्री ओली को २ मिनट भी सत्ता में रहने कि नैतिक अधिकार नहीं है । चारों ओर आलोचना के बाद प्रधानमन्त्री ओली ने जारी अध्यादेश वापस करने की प्रतिबद्धता तो व्यक्त किया है, लेकिन अभी तक वापस नहीं हो रहा है ।
समाजवादी संबंद्ध सांसद् डा. सुरेन्द्र यादव ‘अपरणकाण्ड’ में नेकपा संबंद्ध सांसद् महेश बस्नेत, किसन श्रेष्ठ और पूर्व आईजीपी सर्वेन्द्र खनाल की प्रत्यक्ष संलग्नता की रहस्य तो सार्वजनिक हो चुका है । लेकिन कहा जाता है कि उक्त अपहरणकाण्ड प्रधानमन्त्री ओली के ही निर्देशन में हुआ है । इसतरह की आलोचना के कारण आज नेकपा को बदनाम होना पड़ रहा है । इसी तथ्यको मध्यनजर करते हुए नेकपा के भीतर ओली पक्षधर के अलवा अन्य समूह के नेता उनके विरुद्ध में दिखाई दे रहे हैं । राजनीतक वृत्त में यह भी चर्चा होने लगी है कि अब नेकपा के भीतर से ही प्रधानमन्त्री परिवर्तन के लिए खेल शुरु होनेवाला है ।
वैसे तो इससे पहले ले से ही नेकपा के भीतर ओली कार्यशैली के प्रति असंतुष्ट नेताओं की संख्या अधिक रही थी । शारीरिक और मानसिक रुप में कमजोर स्वास्थ्य अवस्था के कारण प्रधानमन्त्री ओली को बारबार राजनीतिक विश्राम के लिए सुझाव भी आया है । लेकिन उच्च आत्मबल होने के कारण प्रधानमन्त्री ओली पार्टी नेताओं से प्राप्त सुझाव को अनदेखा कर रहे हैं । विश्लेषकों को मानना है कि अध्यादेश और अपहरणकाण्ड के बाद विकसित राजनीतिक घटना क्रमके कारण अब एक बार फिर प्रधानमन्त्री फेरबदल का प्रयास होनेवाला है । और अनुमान है कि इसतरह का प्रयास अब नेकपा के अन्दर से ही घनीभूत होनेवाला है और प्रतिपक्ष में रहे अन्य दल इसके लिए सहयोगी बन सकते हैं । बिहीबार शाम भैंसेपाटी में सम्पन्न नेकपा संबद्ध शीर्ष ६ नेताओं की बैठक को भी इसी दृष्टिकोण से देखा जा रहा है ।

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