Wed. Aug 12th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

जीवन में सुख-दुःख का मुख्य कारण भोग-विलास की अत्यधिक आकांक्षा है : बिमल सर्राफ

 

रक्सौल, पूर्वी चंपारण।
“संसार के दुर्लभ से दुर्लभ और बड़े से बड़े भोग भी मनुष्य को सुखी नहीं बना सकते, यदि उसके मन में शांति नहीं है। अशांत मन वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं हो सकता और जब तक भोगों की कामना बनी रहती है, तब तक मन को वास्तविक शांति प्राप्त नहीं हो सकती।”

उक्त विचार लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322 ई के जोनल चेयरपर्सन, डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन, समाजसेवी तथा भारत विकास परिषद् रक्सौल के सेवा संयोजक एवं मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस को जारी अपने संदेश में व्यक्त किए।

यह भी पढें   २३ और २४ भाद्र के निष्पक्ष जाँच से ही पीडि़तों को वास्तविक न्याय मिलेगा – शंकर पोखरेल

उन्होंने कहा कि भोगों की कामना तब तक समाप्त नहीं होती, जब तक मनुष्य को भोगों में सुख का विश्वास बना रहता है। कामना का स्वभाव ऐसा है कि वह जितनी पूरी होती जाती है, उतनी ही अधिक बढ़ती जाती है। यह कभी पूर्ण नहीं होती।

बिमल सर्राफ ने कहा कि जिस व्यक्ति का मन कामनाओं से भरा रहता है, उसका विवेक धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है और बुद्धि भ्रमित हो जाती है। परिणामस्वरूप वह कामनाओं की पूर्ति के लिए अनेक अनुचित एवं निषिद्ध कर्म करने लगता है और अंततः दुःखों के जाल में फंसता चला जाता है।

यह भी पढें   बालेन की आधी रात की पोस्ट: क्या सत्ता के भीतर बढ़ रही है बेचैनी ?: श्वेता दीप्ति

उन्होंने आगे कहा कि कामना के साथ-साथ क्रोध और लोभ भी मन में प्रवेश कर जाते हैं। जब कामना की पूर्ति में बाधा आती है, तब क्रोध उत्पन्न होता है और जब कामना पूरी होने लगती है, तब लोभ बढ़ने लगता है। जहाँ काम, क्रोध और लोभ तीनों एक साथ उपस्थित हो जाते हैं, वहाँ पाप-कर्म सहज ही मनुष्य के भीतर स्थान बना लेते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति के जीवन में दुःख, कष्ट और मानसिक पीड़ा बढ़ती चली जाती है।

यह भी पढें   राउंड टेबल नेपाल और रोट्रैक्ट क्लब वीरगंज मेट्रोपोलिस का रक्तदान कार्यक्रम, 58 लोगों ने किया रक्तदान

बिमल सर्राफ ने लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि नश्वर भोग-विलास में अत्यधिक आसक्ति रखने के बजाय सत्य, परम सुखदायक एवं शाश्वत ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। ईश्वर के प्रति प्रेम और भक्ति ही मन को स्थायी शांति प्रदान करती है।

अंत में उन्होंने कहा, “संतोष ही सुखी जीवन का सबसे बड़ा रहस्य है। जिस व्यक्ति के जीवन में संतोष है, वही वास्तव में सुखी और शांतिपूर्ण जीवन जी सकता है।”

बिमल सर्राफ

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com