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“कोरोना, कम्युनिष्ट और सेकुलरिज्म”

 

डा. मनोज मुक्ति “विवेक”

६ माह पूर्व तक किसी को “कोरोना” क्या है यह पता भी नहीं था, चाहे वो आम लोग हो या खास ! पर आज पूरी दुनिया परेशान है, त्रस्त है, आतंकित है ! बडे-बडे सुरमा (महाशक्ति राष्ट्र) इस कोरोना के आगे बौना साबित हो रहा है, सम्पूर्ण मानव सभ्यता, ज्ञान-विज्ञान, अर्थतन्त्र प्रत्यक्ष रुप से इसके चपेट में है । कोरोना भाइरस इसे WHO ने कहा है NOVEL CORONA VIRUS अर्थात COVID 19, माना जाता है कि ये दानवरुपी भाइरस चाईना का गिफ्ट है दुनिया के लिए और मेरा मानना है कि अमेरिका Vs चाईना Trade War की ही उपज है ये कोरोना, २१औं शताब्दी के महाशक्ति बनने के होडबाजी में सम्पूर्ण मानव सभ्यता को दाँव पर लगा दिया गया है । जहाँ पूरा दुनिया त्राहिमाम और हाहाकार है वहीं चीन COVID 19 को ब्यापार बनाया हुए है, जहाँ पूरी दुनिया (जल-थल-वायु मार्ग) “लाकडाउन” है वही चीन कोरोना रोकथाम और उपचार सामग्री निर्माण और निर्यात पर पूरा ताकत लगा रखा है और पूरी दुनिया में इस का सप्लाई भी कर रहा है जिससे चीन को कोरोना से हुए क्षति के 100 गुणा ज्यादा फायदा पहुँचना तय है । क्यों न हो आखिर वर्तमान आधुनिक युग में चिनियों को सबसे सफल व्यापारी  माना जाता है, क्योंकि चीन एक क्रुर एक-दलीय कम्युनिष्ट व्यापारिक मुल्क है ! वो सिर्फ ब्यापार करना जानता है, किसी भी मूल्य पर । दुनिया कहती है कि चीन एक कम्युनिष्ट राष्ट्र है, एक दलीय शासन ब्यवस्था और माओवाद अर्थात माओवादी बिचारधारा और सिद्धान्त से ही शासन सत्ता प्रेरित है पर मेरा मानना है कि चीन की सिर्फ और सिर्फ एक ही बिचारधारा है वो है ब्यापार, किसी भी मूल्य और मान्यतायों पर । चीन एक क्रुर, तानाशाही, नोकरशाही व्यापारिक मुल्क है, इस में कोई दो राय नहीं । वैसे तो कम्युनिष्ट और कम्युनिज्म का अर्थ होता है “साम्यवाद और साम्यवादी” पर आज के आधुनिक युग में कोई भी ब्यक्ति या मुल्क अगर अपने आपको कम्युनिष्ट कहता है तो वो सरासर झूठ बोल रहा होता है, क्युँकि सभी कम्युनिस्टों के मेनुफेस्टो, कार्यशैली, आचरण, ब्यवहार को गम्भीरता से देखा जाए तो सभी पुँजीवाद, संशोधनवाद, ब्यक्तिवाद, जातिवाद, समुहवाद के माध्यम से “पुँजीवादी समाजवाद” की दिशा तय करने में अग्रसर दिखता है । कम्युनिज्म और कम्युनिष्ट दोनो सैद्धान्तिक रुप से विकेन्द्रीकरण के सिद्धान्त को स्वीकार नहीं करती है, वो प्रजातन्त्र, जनतन्त्र, लोकतन्त्र, संघीयता, सामुहिक निर्णय और नेतृत्व को नहीं स्वीकारती है । वो धर्म-निरपेक्षता के नाम पर दुनिया को असहनशील, अमर्यादित, अनुशासनहीन समाज निर्माण की ओर हरदम प्रेरित करता है । हाल के दिनों में पूरी दुनिया में दो ही ऐसा राष्ट्र है जहाँ “कम्युनिष्ट और कम्युनिज्म” को मानव सभ्यता का सबसे अच्छा और वरदानी सिद्धान्त, जीवनशैली एवं शासन पद्धति के रुप में ढोल बजाया जा रहा है और वो है चीन और नेपाल । नेपाल जो कुछ वर्ष पुर्व तक एक सनातनी परम्परा, मान्यता, जीवनशैली, मानवता के लिए विश्व विख्यात था ! जो “अतिथि देवो भव:” और “धर्मो रक्षती रक्षित:” के मुल्य-मान्यताओं की उर्वर एवं उदाहरण था आज वही नेपाल “संघीय लूटतान्त्रिक GUNतन्त्र” शासन ब्यवस्था के लपेट और चपेट में कमिसन, भ्रष्टाचार, बलात्कार लगायत के अमानवीय और भ्रष्ट राज्य के रुप में विकसित एवं परिभाषित हो रहा है । पिछले डेढ दशक का नेपाल के परिस्थितियों और घटनाक्रमों को सुक्ष्म विश्लेषण किया जाए तो नेपाल एक राज्य संरक्षित अराजक, दिशाहीन, भ्रष्ट एवं आर्थिक आतंकवाद के पक्षपोषक एवं पृष्टपोषक राष्ट्र के रुप में अग्रसर दिखाई पडता है । नेपाल के संसदीय राजनीतिक दल और राज्य-सत्ता में आसीन महामहिमों का सिर्फ और सिर्फ एक ही सिद्धान्त है “ANY HOW पैसा कमाऊ” और “अपना काम बनता भाँड में जाए देश और जनता” । कमीशन और भ्रष्टाचार के समुन्द्र में नेपाली राज्य सत्ता इतना डूब गया है कि दानवीय प्रवृत्ति की सारी हदें पार कर चुका है । जिस तरह आज पूरी दुनिया में कोरोना ही “सेकुलर अर्थात धर्म-निरपेक्ष” है, वो कोई जातपात, धर्म, समुदाय, राष्ट्र में भेदभाव नहीं करता इसी तरह आज के दिन में कोरोना भाइरस के ही समगोत्री कम्युनिष्ट और सेकुलरिज्म है । सभ्य बनें, शाकाहारी बनें, सुरक्षित रहें !! सनातनी सभ्यता ही सर्वोत्तम हैं !! अहिंसक जीवनशैली ही सुरक्षित भविष्य की राह है !!

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डा. मनोज मुक्ति “विवेक” (डा. मनोज कुमार झा) राष्ट्रिय अध्यक्ष जनतान्त्रिक तराई मुक्ति मोर्चा

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