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एक नर्स की नियति स–परिवार संक्रमित, लेकिन आत्मविश्वास के सामने कोरोना को होना पड़ा पराजित

 

अमेरिका, २६ अप्रील । आशा साह बिगत ९ साल से नर्सिङ पेशा में सेवारत हैं । वह अपने पति अमित साह और बेटा के साथ न्यूयोर्क में रहती है । यह परिवार सिरहा जिला के भवानीपुर के निवासी हैं । न्यूयोर्क स्थित जकोभी मेडिकल सेन्टर में कार्यरत साह पिछले दिन (मार्च तीसरे हफ्ता के बाद) कोरोना संक्रमितों की सेवा में रातों–दिन क्रियाशील रही, यह उनकी सेवा और बाध्यता दोनों है ।
हां, आज कोरोना वायरस की महामारी विश्वव्यापी है । चीन से शुरु कोरोना वायरस का सबसे अधिक प्रभाव अमेरिका में दिखाई दे रहा है । अमेरिका में अभी तक ५२ हजार से अधिक लोगों की मृत्यु कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हो चुकी है । इसीलिए आज डॉक्टर तथा नर्स लगायत स्वास्थ्यकर्मी को कोरोना कई संक्रमित लोग भगवान रुप में मान रहे हैं । ऐसी ही पृष्ठभूमि में आशा साह भी दिन रात अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रही थी ।
घटना गत मार्च अंतिम हफ्ता की है । मार्च २६ का दिन था । लगातार ५ दिन तक काम करने के कारण वह थक चुकी थी । मार्च २७ से ३ दिनों की छुट्टी में वह अपने घर वापस  आ गई थी । लेकिन उसी क्रम में उनमें थकान और बुखार संबंधी लक्षण दिखाई देने लगे, जो कोरोना वायरस संबंधी लक्षण से भी मिलती–जुलती थी । लेकिन उच्च सतर्कता संबंधी आत्मविश्वास के कारण शुरु में उनमें कोरोना संबंधी आशंका कम ही था । तब भी घर आते ही उन्होंने पति और बच्चे को कहा है कि मैं होम क्वारेन्टाइन में रहती हूं । सलाह के अनुसार ही वह होमक्वारेन्टाइन में रहने लगी । लेकिन परीक्षण ना होने के कारण कोरोना संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई थी ।
कई प्रयासों के बाद २९ तारीख को कोरोना परीक्षण के लिए नमूना लिया गया । इधर ३० तारीख से ही उनके पति अमित को भी बुखार शुरु हो गया था । धीरे–धीरे उनमें भी कोरोना संबंधी लक्षण दिखाई देने लगा । लेकिन आशा विश्वस्त थी कि वह अपने पति और बच्चें से दूरी बनाकर रह रही है, इसीलिए उनमें कोरोना नहीं, अन्य सामान्य बुखार होगा ।

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इसीबीच में परीक्षण का रिपोर्ट सार्वजनिक हो गया । रिपोर्ट अनुसार आशा में कोरोना संक्रमण हो चुका था । बहुत मुश्किल से उन्होंने अपनी बात पति को बताई । लेकिन उनके सामने आत्मविश्वास को दृढ़ रखना ही एक मात्र विकल्प था । उन्होंने खुद को सम्हाल लिया और परिवारिक सेवा को भी निरन्तरता दी । इधर अमित को १०३ डिग्री बुखार था । नजदीक के मेडिकल से कुछ औषधी लाकर सेवन कर रहे थे । आशा और अमित दोनों बीमार होने के कारण ६ वर्षीय बच्चे की देखभाल ठीक से नहीं हो रही थी । उसको मम्मी–पापा से दूरी बना कर रहने का तरीका, हाथ धोने की तरीका आदि सिखाया गया था । इसीलिए वह सुबह सबेरे उठकर अपना नित्यकर्म खुद करता था ।
अप्रिल ४, शनिबार के दिन । सभी अपने–अपने जगह सो रहे थे । सुबह सबसे पहले उठकर हाथ–मुंह धोनेवाले, ब्रस करनेवाले बच्चे नहीं उठ रहे थे । पता चला कि उसको भी तेज बुखार है । अन्ततः परिवार के तीनों सदस्य कोरोना से संक्रमित हो चुके थे । ऐसी अवस्था में चिन्ता स्वाभाविक है, लेकिन आशा और अमित को पता था कि हड़बड़ाने से होनेवाला कुछ भी नहीं था । आशा को स्वास्थ्यकर्मी  होने के कारण पता था कि आत्मबल उच्च रखकर स्वास्थ्य का खयाल रखना चाहिए । इसीलिए परिवार के सभी सदस्यों ने आत्मबल को उच्च बनाया । आशा कहती है– ‘हम लोग डाक्टर के सुझाव अनुसार नियमित औषधी सेवन कर रहे थे, लम्बी–लम्बी श्वास लेने की अभ्यास करते थे । नींबू, हनी और अदरक के साथ गरम पानी पीते थे ।’
अन्ततः वे लोग कोरोना को जीत रहे हैं । चिकित्सकीय रिपोर्ट अनुसार अमित ९५ प्रतिशत रिकभर हो चुके हैं । नर्स आशा को कहना है कि जब तक श्वास–प्रश्वास संबंधी जटिल समस्या नहीं आती, तब तक कोरोना उपचार के लिए अस्पताल में ही रहना चाहिए, ऐसी बाध्यता नहीं है । उनका मानना है कि घर में ही हम लोग उपचार कर सकते हैं । इसके लिए डाक्टरों की सुझाव अनुसार नियमित औषधी सेवन, प्रशस्त आराम और उच्च मनोबल ही सबसे बेहतर उपचार है । अन्त में आशा कहती है– ‘कोभिड पोजेटिभ होते ही डरने की जरुरत नहीं है । हम लोग तो रिकभर हो चुके है । अगर आप भी संक्रमित हैं तो आप भी रिकभर हो सकते हैं । लेकिन स्वास्थ्य के प्रति कोई लापरवाही नहीं होना चाहिए । आत्मविश्वास को कायम रखे । अगर श्वासप्रश्वास में समस्या है तो तत्काल अस्पताल जाइए ।’

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