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सरकार द्वारा बीरगंज में दूध की आपूर्ति रोकना अमानवीय कार्य : शशिकपूर मियां

 

नेपाल में कोरोना महामारी का सबसे बड़ा कहर पर्सा  (बीरगंज) में पड़ा। लम्बे समय लॉक डाउन को झेला उसके बाद निषेधाज्ञा। आम आदमी रोजमर्रा की जरूरत पूरा करने को जद्दोजहद में है। आपूर्ति ठप है, स्थानीय स्तर पर सीमित उत्पादन है जो जरूरत पूरा करने में नाकाफ़ी है। उस पर भी दुःखद खबर आई कि पर्सा में D D C के दूध को हेत्तौड़ा में ही रोक दिया गया। इतना अमानवीय कार्य तो विश्व युद्ध से समय भी नही हुआ था।

प्रदेश ३ ने प्रदेश २ में जाने रास्तो को बन्द कर दिया है। सुरक्षा के लिहाज़ से सावधानी और रोकथाम जरूरी है लेकिन जो अतिआवश्यक है उसे रोकना गलत है। खाद्यान्न, दूध, औषधि ये सब तो किसी तरह रोकना उचित नही है। अगर यही नीति है तो बीरगंज नाका से पूरे नेपाल जाने वाले सामग्री को भी रोक देना चाहिए। एक ही विषय मे दो मापदंड घातक सिद्ध होगा।
दूध रोकने के बाद सुबह से माताए दुःख और व्यथा से तड़प रही है, वे अपने बच्चों को क्या खिलाए, कैसे पाले ? उस पर भी प्रदेश न. २ की सरकार इतना निकम्मा और संवेदनहीन हो गई है कि इन समस्याओं पर बिल्कुल ध्यान नही दे रही है।
ये चेतावनी के संकेत है, अगर केंद्र और प्रदेश इसी प्रकार निष्ठुर बनी रही तो जनता में बिस्फोट हो सकता है, जो बहुत ही भयावह होगा। अगर लोग सहयोग कर रहे है तो उनके सहयोग को नाजायज़ लाभ उठाना गलत है। इसमे केंद्र और प्रदेश सरकार को अविलंब समन्वय करके दूध और अन्य अत्यावश्यक सामग्री की आपूर्ति करने को प्राथमिकता के साथ उपलब्ध कराना होगा।
# शशिकपूर मियां, मधेश आंदोलन के अगुवा और जनता समाजवादी पार्टी के केंद्रीय सदस्य है।

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