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बड़ा सत्य यही है कि पैसे से प्रायः सुख भोग की हर वस्तु खरीदी जा सकती है : इन्दु तोदी

 

“” किसकी करनी कौन भरे !! “”

मैं कोई विद्वान नही ना ही वेद पुराण, धर्म ग्रन्थों की ज्ञाता । बस जब किसी निर्दोष निरीह को पिसता टूटता बिखरता या कष्ट झेलता देखती हूँ तो हमेशा एक  सवाल उठता है इन सब का जिम्मेदार कौन????? क्या इस के लिए ये स्वयं दोषी हैं क्या ये इन के किसी पिछले या इस जन्मों के फलां हैं ?????
वे गरीब मासूम अनपढ क्या जाने ग्रन्थ गीता या धर्म की बड़ी बड़ी बातें!!!!! उन्हें तो हर हाल में दो वक्त की रोटी का बस जुगाड़ करना होता है ।
हाँ कोई तो दृष्य या अदृश्य शक्ति है निःसंदेह ही जिस से सबकुछ बखूबी नियन्त्रित हो रहा है जिस के आगे कहीं जाकर हम सब मात खा जाते हैं निष्क्रिय हो जाते हैं शायद इसी शक्ति को लोगों ने अलग अलग नाम दे रखा है , हम उसे भगवान या ईश्वर कहने लगे किन्तु यह भगवान किसी ईंट पत्थर से बने मन्दिर या मूरत तस्वीर तक में सीमित रह सकता हो यह मुझे नही लगता यह तो अनन्त है अनादि है जो न वस्त्र धारण करता है न भोग प्रसाद ही!
जहाँ तक हम कर्मानुसार फल की बातें करतें हैं सही है पर कई जगह सही नही भी है मेरी दृष्टि में वह यूँ की एक गर्भस्थ शिशु जिसका अभी जन्म भी न हुआ हो उसको कोख में ही मार दिया जाता है उस में उस के कौन से किए गए कर्मों का फार्मूला फिट होगा?
दूसरा एक बच्चा जो अभी अभी जन्म लेकर धरती पर आया है उसे किसी कचरे के ढेर पर या किसी मन्दिर के बाहर छोड़ दिया जाता है उस में उस के कौन से कर्म की परिभाषा लागू होती है ।
तीसरा एक चार साल की बच्ची जो कुछ सोचने या समझने के लायक ही नही है उस के साथ तथाकथित उसी देवता के मन्दिर या अल्लाह के घर मस्जिद के अन्दर ही भयानक दुष्कर्म की शिकार हो जाती है वह अपने किस कर्म की सजा भोगती है ????
चौथा एक बहू जो ससुराल में उस के माँ बाप द्वारा अच्छा दहेज के न देने की वजह से प्रताड़ित होती है या जला दी जाती है उस में उस के कौन से कर्म आड़े आ जाते हैं?????
कोई माने या ना माने आज का सब से बड़ा सत्य यही है की पैसे से प्रायः सुख भोग की हर वस्तु खरीदी जा सकती है । एक बच्चा जो जन्म ही निर्धन परिवार में लेता है और जिंदगी का बड़ा हिस्सा संघर्ष में बिता देता है उस में और अमीर बच्चे के कर्मों में क्या फर्क होता है।
एक गरीब मजदूर जो हम मध्यमवर्गीय या उच्च वर्गीय मनुष्य से
कहीं ज्यादा मेहनत करता है बिना किसी को कोई दुःख हानी पहुँचाए । वो है तो कल कारखाने जिन्दा है जहाँ हम सब की नित्य जरूरतों का सामान बनता है जिसके बगैर हमारे दिन की शुरुआत की भी कल्पना नही की जा सकती । वही मजदूर गाड़ी बनाता है पर खुद पैदल चलता है वही मजदूर चप्पल बनाता है और खुद नंगे पांव चलता है, महंगे कपड़े बनाता है खुद फटे पुराने पहनता है उस में उस के कौन सा दुष्कर्मोंका दोष निहीत होता है?????
एक किसान जो धुप बर्षा में दिन रात कड़ी मेहनत से अन्न उपजाता है सबका पेट भरता है किन्तु कभी सुखा पड़ जाए , बाढ़ आ जाए , कम पैदावार हो जाए तो हम आप के नही उस के खेत खलिहान घर बार बिक जाते हैं, बाल बच्चे भुखे मर जाते हैं , महाजन के कर्जे में डुब आत्महत्या तक करने तक की खबरें आए दिन अखबार समाचारों में आ जाती है , गाँव घरों मे आज भी कई मजबूर किसानों को साहूकारों की दया पाने के लिए अपने घर की बहू बेटी तक की मान मर्यादा को दांव पर लगाना पड़ जाता है वो उन के किस कर्मों की सजा होती है???????
बेजुबान निरीह जानवर जिन्हे लोग अपने रसास्वादन केलिए जिन्दों को काटकर खा जाते हैं या निचे आग सुलगाकर उपर उन्हे लटकाकर भाला घोपकर पकाकर खाते हैं ऐसी दर्दनाक यातना के लिए उन के कौन से कर्म जिम्मेदार होते हैं?????????
और भी ना जाने कितने ही निर्दोष मासूम अपने  ना किए कर्मों का फल यहाँ रोज भुगतते आ रहे हैं आप कहेंगे यह उन के पूर्व जन्मों के पाप या श्राप का फल है ! क्यों और कैसे मानें हम इस बात को???? कोई प्रमाण है किसी के पास किसी के पुनर्जन्म का??????
उदाहरण के लिए मान लिजिए मैने किसी का एक हाथ तोड़ दिया और कहा की इस ने पूर्व जन्म में मेरा तोड़ा था सो इसलिए इसे इसकी कर्मों की सजा इस जन्म में मिली है , क्या आप मेरी इस दलील को सहर्ष स्वीकार लेंगे या कानून इसे मान्यता दे देगा???????
हो रहा यह है की हम हमारा देश समाज वर्ग अपनी सहुलियत के हिसाब से चीजों को दर्शातें हैं, भगवान का नाम लेकर अपना पल्ला बड़ी आसानी से झाड़ लेते हैं ।
एक किसान किसान ही रहकर, एक मजदूर मजदूर ही रहकर या कर्मचारी कर्मचारी ही बने रहकर क्यूँ नही आराम से रह सकते हैं सुखों का भोग कर सकते हैं, क्यूँ कोई भी आपदा सब से पहले उन के घर के अन्दर आसानी से प्रवेश पा जाती है उन्हे  तबाह कर देती है????? क्यों समाज कई वर्गों में विभाजित है????? सोचिएगा जरूर!!!! उन के कर्मों का फल ? पूर्व जन्मों का पाप ??  भगवान की माया ????? या समाज देशों के आप के हमारे द्वारा किए गए प्रतिपादित सिस्टम??????

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इन्दु तोदी, धरान, नेपाल |

पाा

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