लॉक डाउन का मार, पड़ा जनता पर भारी, लेकर कर में प्राण, सड़क पर है नर नारी : अजय कुमार झा
पलायन
लोग पलायन हो रहे, कोरोना बना है काल।
कर्म भूमि को छोड़कर, जन्म भूमि का लाल।।
जन्म भूमि का लाल, कि दिल्ली डराने लगा है।
भुखमरी से वेहाल, कोरोना काल बना है।।
बाल बृद्ध घबराय, करें क्या जाएँ कहाँ हम?
गाँव है कोशो दूर, सड़क पर तोड़ रहे दम!! 1
कोई गुप-चुप कर रहा, कोरोना का प्रसार।
और कई धर्मान्ध जन, मौत का करे व्यापार।।
मौत का करे व्यापार, कि अल्लह है रखवाला।
लाख कहे सरकार, बात नहीं मानने वाला।।
मौला हुआ पलायन, मस्जिद खाली पड़ गए।
कोरोना बन सरकार, जेहादी के सर चढ़ गए।। 2
महामारी के त्रास से, करते नित्य प्रयाण।
कोरोना के संत्रास से, सहर हुआ वीरान।।
सहर हुआ वीरान, मौत का कहर है भाड़ी।
विवस है जन अविराम, पलायन को नर नारी।।
लॉक डाउन का मार, पड़ा जनता पर भारी।
लेकर कर में प्राण, सड़क पर है नर नारी।। 3
नाम- अजय कुमार झा



