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आतंकवादी हाफिज सईद के चार करीबी सहयोगियों पर अभियोग कायम

 

पाकिस्तान की एक आतंकवाद-निरोधी अदालत ने मंगलवार (9 जून) को 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के चार करीबी सहयोगियों पर अभियोग कायम कर दिया। प्रतिबंधित जमात-उद-दावा के इन चार शीर्ष आतंकियों को आतंकवाद को वित्तपोषण मामले में अभियोग लगाया गया है।

अदालत ने हाफिज अब्दुल रहमान मक्की, मलिक जफर इकबाल, याहा अजीज और अब्दुल सलाम को आतंकी वित्तपोषण के आरोपों में उनके खिलाफ दर्ज मामलों में से एक में अभियोग लगाया। हालांकि, सभी चार आरोपियों ने “दोषी नहीं” होने का अनुरोध किया और मुकदमा लड़ने की इच्छा जताई।

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अदालत ने अभियोजन पक्ष को संदिग्धों के खिलाफ गवाह पेश करने के निर्देश के साथ कार्यवाही बुधवार (10 जून) तक के लिए स्थगित कर दी। पाकिस्तान के पंजाब पुलिस के आतंकरोधी विभाग ने 70 वर्षीय सईद और उसके गुर्गों के खिलाफ सूबे के विभिन्न शहरों में आतंक को वित्तपोषण के आरोप में 23 एफआईआर दर्ज की थीं।

सईद, संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी है, जिसपर अमेरिका ने एक करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम रखा है। सईद को 17 जुलाई, 2019 को गिरफ्तार किया गया था और यहां उच्च सुरक्षा वाली कोट लखपत जेल में बंद किया गया था। सईद के नेतृत्व वाली जमात-उल- दावा आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मातृ संगठन है, जो 2008 के मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार है। इस हमले में छह अमेरिकी सहित 166 लोग मारे गए थे।

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अमेरिका ने सईद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया है। उसे दिसंबर 2008 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 के तहत एक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। फरवरी में, लाहौर की आतंकवाद-निरोधी अदालत ने सईद और उसके करीबी सहयोगी ज़फ़र इकबाल को साढ़े पांच साल की सज़ा सुनाई और प्रत्येक मामले में 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया। कुल 11 साल की सजा साथ-साथ चलेगी। अमेरिका ने सईद की सजा का स्वागत किया और इसे आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए “महत्वपूर्ण कदम” के रूप में वर्णित किया। आतंकी वित्तपोषण और धनशोधन पर अंकुश लगाने और सईद के संगठन पर प्रतिबंध लगाने को लेकर पिछले साल अंतरराष्ट्रीय आतंकी वित्तपोषण पर नजर रखनेवाली संस्था ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी।

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