Tue. Jul 7th, 2020
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जीवन का बस एक ही लक्ष्य है, ये पैसा ही सबका मकसद है : लालिमा घोष

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बदलती जिंदगी__

बचपन के वो बीते लम्हे
सुंदर सलोने दिन थे अपने
आजादी से भरा था जीवन
प्यारा सा था वो अपनापन
मौज मस्ती और अल्हड़पन
आस पड़ोस लगते थे अपने
भेदभाव कुछ नहीं था हममें
दिखावा नहीं था अपनेपन में
गपशप तो घंटों करते थे
सुख दुःख मे हम साथ सभी थे
प्रदूषण से हम मुक्त तभी थे
दुर्नीति से हम दूर तभी थे
भ्रष्टचारिता छाई ना थी
धर्म सभा होती रहती थी
खुशियां हमें दस्तक देती थी
वह जीवन के अद्भुत क्षण थे
धीरे धीरे समय ढलता गया
दिखावटी जमाना अब आ गया
स्वार्थ डोर को कसे हुए अव
जीवन रथ को खींच रहे सब
मान मर्यादा सब लुढ़क रहे हैं
परवाह तो करते ही कहां हैं?
जीवन का बस एक ही लक्ष्य है
ये पैसा ही सबका मकसद है
विचारधाराएं अब बदल रही है
कालिमा युक्त राजनीति छाई है
मोबाइल को तो लिए हाथ में
झूठी बातें कह रहे ये शान में
घूसखोरी हर तरफ छा गई है
अब सोच हमें इस बात की है
हे विधाता!! बदले यह दुनिया
पर तू कभी ना यूं ही बदलना।

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