अद्भुत केक कलाकृति ” मेरी केक-मेरी कलाकृति” : रूबी चमड़िया
रूबी चमड़िया आदर्शनगर,वीरगंज (नेपाल) । हम घरेलु औरतों के व्यस्त जीवन में बडी मुश्किलसे वो दिन आता हे जब हमें घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों से कुछ राहत मिल जाती है और हम अपने लिये भी कुछ सृजनका समय निकाल पाते हैं।
मुझे तरह-तरह के पकवान बनाने का शौक तो था ही ।पर जब मेरे जीवन में
कुछ अवसाद के क्षण आए तब परिवारमें सभी का साथ पाकर मैंने स्वयं को व्यस्त रखने केक को ही अपनी सृजण का बिन्दु बनाया। तब ही मैं आज इस मुकाम तक पहुँची हूँ।

बच्चे अपनी पढाई पूरी करने के लिए बाहर चले गए तब मुझे अधिक ख़ाली समय भी मिलने लगा। मैंने अपने शौक़ को फिर से ताज़ा करने की चाहना से अपनी सहेलियों को अपने कुछ खास पकवान बना कर खिलाए तो उन लोगों ने उसकी बहुत तारीफ़ की और मुझसे सीखने की ज़िद्द करने लगीं।
उस समय मेरा पहला कदम मेरे काम की ओर बढ़ा, हालाँकि मैं नहीं जानती थी कि मेरा शौक़ मेरा प्रोफेशन बन जाएगा।
मैंने बस कुछ लोगों को सिखाना शुरू कर दिया और यहाँ से मेरे काम की शुरूआत हुई।
जब भी घर में किसी का जन्मदिन होता था तो मैं खुद ही केक बनाती थी, जो आने वाले सभी मेहमानों को भी बहुत पसंद आता था।
एकबार मेरी सहेलियों ने अपने घर की पार्टी मैं मुझसे केक बनवाया, लोगों ने पसंद किया और जल्द ही मेरे पास केक के ऑर्डर आने लगे,ऐसे मेरे प्रोफेशन की स्वतः शूरुआत हो गई।
जल्द ही मेरा काम बढ़ने लगा और मेरे पास ऑर्डर भी ज्यादा आने लगे। लोगों के आग्रह पर मैंने ऑर्डर पर केक के साथ और भी पकवान बनाने शुरू कर दिए। अब तो ये हाल है कि बहुत बार ज्यादा ऑर्डर आने पर मुझे मना भी करना पड़ता है।
पारिवारिकजनों के सहयोग व साथ से मैं ये काम करके बहुत खुश हूँ।
इसमें ही मैं अपने आप को व्यस्त रखती हूँ। लोग मेरे केक को तथा अन्य पकवानों को बहुत पसंद करते हैं यह मेरे लिए ख़ुशी की बात है।

हर नारीको विपत्तिको अवसर में बदलनेका प्रयास करना चाहिये और यही मैने किया। हम सबके अन्दर भगवान ने क्षमता विशेषता दी है, आवश्यकता है कुछ नया कर गुजरने की। आप आगे बढेंगे तो साथ देने वाले हाथ भी साथ हो जावेंगे।जैसा की मैने जीवनमें अनुभूत किया।




