कालापानी में भारतीय सेना की भोगाधिकार है, लेकिन स्वामित्व नहींः सांसद् अधिकारी

काठमांडू, १८ जून । प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के नेता तथा राष्ट्रीयसभा सदस्य राधेश्याम अधिकारी ने कहा है कि नेपाली भूमि कालापानी में भारतीय सेना की भोगाधिकार है, लेकिन स्वामित्व नहीं । उनका कहना है कि सन् १९६२ में कालापानी में भारतीय सेना खूद आकर बैठ गया है, नेपाल ने नहीं बुलाया था । अधिकारी ने यह भी कहा कि अब उसको वहां से वापस होना चाहिए । लिम्पियाधुरा सहित की नयां नक्सा पारित करते वक्त बिहीबार आयोजित राष्ट्रीयसभा बैठक में बोलते हुए उन्होंने ऐसा कहा है ।
नेता अधिकारी को मानना है कि लिम्पियाधुरा, लिपुलेक और कालापनी नेपाल का है, उक्त भू–भाग सहित की नयां नक्सा जारी करने के लिए नागरिक–स्तर से दबाव आ रहा था, इसके संबंध में भारत को भी जानकारी दी गई थी । नेता अधिकारी ने आगे कहा– ‘कुटनीतिक वार्ता के लिए नेपाल ने निरन्तर आग्रह किया, लेकिन वार्ता नहीं हो पाया । लेकिन कोभीड–१९ महामारी के बीच में ही दिल्ली से लिंकरोड उद्घाटन करने का काम हुआ, जो आग में घी रखने की तरह हो गया ।’
नेता अधिकारी को मानना है कि आज भारतीय अधिकारी गलत सन्देश प्रवाह कर रहे हैं । उन्होंने कहा– ‘भारतीय मित्र लोग एक ही प्रश्न करते हैं– १७ चेक पोस्ट वापस किया गया, लेकिन वहीं एक सैनिक कैंप क्यों रहने दिया ?’ नेता अधिकारी ने आगे कहा– ‘सन् १९६२ में भारत–चीन युद्ध के समय में भारतीय सुरक्षा फौज कालापानी में आकर बैठ गया, नेपाल ने नहीं बुलाया था । वे लोग खूद आकर बैठ गए थे, आज उन लोगों की भोगाधिकार हैं । कानूनी भाषा में ‘भोगाधिकार’ और ‘स्वामित्व’ कहकर दो शब्द होते हैं । भोगाधिकार होते ही स्वामित्व नहीं होता ।’
नेता अधिकारी को मानना है कि उस समय नेपाली सेना को तालीम देने के लिए भारतीय सेना नेपाल आई थी, वही सेना नेपाल–चीन बोर्डर क्षेत्र में १८ पोस्ट खड़ा कर रहने लगी थी, १७ पोस्ट तो वापस की गई, लेकिन उसमें से एक (कालापानी) से वापस नहीं किया गया । उनका मानना है कि इसमें नेपाल की भी कमजोरी है । नेता अधिकारी कहा कि तत्कालीन परिस्थिति को मध्यनजर करते हुए नेपाल ने वहां भारतीय सेना को रहने के लिए छूट दी, लेकिन नेपाली भूमि अतिक्रमण के लिए नहीं ।

