नेकपा द्वारा ७ साल के बाद ही अंगीकृत नागरिकता प्रदान करने का निर्णय, प्रदेश नं. २ में विरोध

काठमांडू, २० जून । सत्ताधारी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) ने निर्णय किया है कि नेपाली पुरुष के साथ शादी करनेवाले विदेशी महिलाओं को शादी के ७ साल बाद ही अंगीकृत नागरिकता प्रदान किया जाएगा । आज नेकपा पार्टी की ओर से इसतरह का निर्णय सार्वजनिक होते ही प्रदेश नं. २ में इस विषयों को लेकर प्रदेश सांसदों ने विरोध शुरु किया है ।
आज (शनिबार) आयोजित प्रदेशसभा बैठक में जनता समाजवादी (जसपा) और नेपाली कांग्रेस संबंद्ध सांसदों ने नेकपा द्वारा जारी निर्णय को विरोध करते हुए कहा है कि सत्ताधारी दल नेपाल और भारत बीच रहे वैवाहिक और सांस्कृतिक संबंध को तहस–नहस करना चाहती है, इसीलिए यह निर्णय आया है । उन लोगों ने यह भी कहा है कि यह निर्णय स्वीकार्य नहीं हो सकता ।
प्रदेश सभाको सम्बोधन करते हुए जनता समाजवादी पार्टी के नेता मनिष कुमार सुमन ने कहा कि राज्य व्यवस्था समिति को प्रभावित करते हुए नेकपा ने इसतरह का निर्णय किया है । उन्होंने आगे कहा कि यह महिला और मधेश विरोधी निर्णय है । नेकपा निर्णय के विरुद्ध प्रदेशसभा से प्रस्ताव पारित कराने के लिए भी उन्होंने आग्रह किया । उनका यह भी मानना है कि माता सीता के युग से भी पहले से नेपाल–भारत संबंध है, उस को संरक्षण करना जरुरी है । नेता सुमन ने कहा है कि भारत को लक्षित कर यहां कानून निर्माण किया जा रहा है ।
इसीतरह नेपाली कांग्रेस के सांसद् शिवचन्द्र चौधरी, जनता समाजवादी के सांसद् चमेली देवी साह, रानीशर्मा तिवारी ने भी नेकपा निर्णय को विरोध किया है । उन लोगों को मानना है कि वि.सं. २०६३ साल में जारी अन्तरिम संविधान के प्रावधान अनुसार ही नेपाली पुरुष के साथ शादी करनेवाले महिलाओं को नागरिकता मिलनी चाहिए ।

