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गोरखा का रुई गाँव जिसपर आज है चीन का आधिपत्य, बेखबर सरकार

 

गोरखा।

लिपुलेक, लिम्पियाधुरा, कालापानी  क्षेत्र को सरकार ने नेपाल के नक्सा में समेटा है किन्तु   बर्षौ से चीन के कब्जा में रहे गोर्खा के एक गाँव जो नेपाल का है उस पर चुप्पी रही है । इस गाँव के अतिरिक्त भी चीन द्वारा कब्जा किए जमीन के सन्दर्भ में नेपाल सरकार हमेशा से चुप रही है । नए नक्शे के साथ ही रुई गाँव की चर्चा भी जनता में जोर शोर से चल रही है ।  अपनी ही जमीन को सरकार ने क्यों चीन को दिया यह सवाल सामने आ रहा है ।

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६० बर्ष से गोरखा के उत्तरी क्षेत्र में स्थित रुई गाँव चीन के कब्जा में है ।  गोरखा का साविक सामागाउँ गाविस मे् पडने वाला  रुई गाउँ वि.स. २०१७ साल से पहले नेपाल की तरफ ही था । पर आज उस पर चीन का कब्जा है ।

नेपाल द्वारा गँवाने वाले रुई गाँव में आज भी ७० से ८० घर हैं ।

जिला मालपोत कार्यालय गोरखा में समेत २०१७ साल से पहले रुई गाउँ के स्थानीय द्वारा उस क्षेत्र के जमीन का राजश्व देने का तथ्यांक मिलता है । विर्ता सम्बन्धि नम्बरी ढड्डा नम्बर १ में रुइगाउँ लगायत का स्थान का ‘तिरो’ चुकाने का प्रमाण कार्यालय में सुरक्षित है ।

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तत्कालिन चीन के साँस्कृतिक क्रान्ति के बाद रुई गाउँ में भी धार्मिक स्थल, ग्रन्थ आदि नष्ट करने का अभियान शुरु होने के बाद  रातोरात स्थानीय भाग कर साम्दो आ गए थे । उस समय का कुछ मुर्ति सहित सैकडो बर्ष पूराना ताम्रपत्र समेत स्थानीय बचा कर लाए थे । जो आज भी सुरक्षित है । गाँव के लोग आज भी कहते हैं कि दोनों गाँव में एक दूसरे से सब कुछ मिलता है आना जाना भी होता है पर यह समझ में नहीं आता कि नेपाल ने अपना गाँव चीन को क्यों दे दिया ।

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