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जनमत पार्टी के ७ केन्द्रीय सदस्य द्वारा पार्टी परित्याग, डा. राउत प्रति असंतुष्टी

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रबिन्द्र यादव / नवलपरासी पश्चिम नवलपरासी, २७ जुन ।

डा. सीके राउत नेतृत्व में रहे जनमत पार्टी के साथ आबद्ध ७ केन्द्रीय सदस्यों ने पार्टी परित्याग किया है । एक पत्रकार सम्मेलन करते हुए असंतुष्ट पक्षधर ने इसके बारे में जानकारी दी ।
असंतुष्ट पक्ष का कहना है कि डा. राउत और सरकार के बीच एक साल पहले सम्पन्न ११ सूत्रीय सहमति के प्रति उन लोगों की समर्थन नहीं था, इसीलिए पार्टी परित्याग किया गया है । इसतरह पार्टी परित्याग करनेवालों में से कैलाश महतो भी है, जो डा. राउत के लिए राइटह्याण्ड माने जाते हैं । स्मरणीय है, तत्कालीन स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन में डा. राउत संयोजक और महतो सह–संयोजक थे ।
महतो के साथ नवलपरासी के धुव्र प्रसाद गौड, राजमित पासवान, कपिलबस्तु के हकिकुल्ला मुसलमान, सिरहाकि सतिला यादव, बारा के दिनेश प्रसाद यादव, पर्सा के संजय कुमार साह ने भी पार्टी परित्याग किया है, जो सभी केन्द्रीय सदस्य हैं । पार्टी परित्याग करते हुए महतो ने कहा कि डा. राउत के नेतृत्व में निर्मित जनमत पार्टी मधेश की हकहित के लिए काम नहीं कर रही है, नेकपा नेतृत्व में रहे सरकार का ही वकालत कर रही है । उनका कहना है कि डा. राउत अब मधेश का मुद्दा भी भूल चुके हैं, इसीलिए वह एकल निर्णय से मनमौजी पार्टी संचालन करते हैं ।
महतो का कहना है कि जनमत पार्टी परित्याग करनेवाले ७ केन्द्रीय सदस्य अब उक्त पार्टी में साधारण सदस्य भी नहीं रहेंगें । उन्होंने यह भी जानकारी दी है कि जनमत पार्टी से अलग होनेवाले और असंतुष्ट अनय पक्षधर के बीच जल्द ही विचार–विमर्श की जाएगी और भावी दिशा तय की जाएगी ।
इसीतहर जनमत पार्टी नवलपरासी जिला कार्य समिति ने भी सामूहिक इस्तिफा दी है । श्रीकृष्ण यादव नेतृत्व में रहे २३ सदस्यीय जनमत पार्टी जिला कार्य समिति से आबद्ध २१ सदस्यों ने सामूहिक इस्तिफा दिया है । कहा गया है कि जिला कार्यसमिति में रहे सभी पदाधिकारी तथा सदस्य डॉ. राउत के प्रति असंतुष्ट है और उन लोगों का भी यही कहना है कि डा. राउत के नेतृत्व में मधेश का एजेण्डा स्थापित होनेवाला नहीं है ।
कैलाश महतो, राजमति पासवान और धुव्र प्रसाद गौड द्वारा हस्ताक्षरित विज्ञप्ती में कहा है– ‘डॉ. राउत पार्टी के भीतर एकल–तानाशाही, अहंकारी, घमण्डी चरित्र के हैं, पार्टी के भीतर गुट–उपगुट सिर्जना कर तत्कालिन स्वतन्त्र मधेश गठबन्ध से आबद्ध रहकर मधेश आन्दोलन को योगदान करनेवाले और जेल जीवन भूगतनेवाले वास्तविक कार्यकर्ताओं को अनदेखा करते हुए अपने निकट रहे व्यक्तियों को ही पार्टी में उच्च स्थान देते हैं और पार्टी को भर्तिकेन्द्र बनाते हैं ।’

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