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पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र वीर विक्रम देव शाह के लिए इस बार नही आएगा गोरखनाथ मंदिर से महाप्रसाद

 

नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र वीर विक्रम देव शाह के जन्मदिन पर आठ जुलाई को इस साल गोरखनाथ मंदिर में पूजा तो होगी लेकिन शाही परिवार को मंदिर की ओर से प्रसाद नहीं भेजा जाएगा। मंदिर के मुख्य पुजारी कमलनाथ ने कोरोना संक्रमण का हवाला देते हुए नेपाल नरेश को पत्र भेजकर इस बात से अवगत करा दिया है।

साथ ही यह भी कहा है कि हालात सामान्य होने पर पूर्व की भांति महाप्रसाद भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने नेपाल नरेश को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए राजपरिवार सहित नेपाल राष्ट्र के सुख समृद्धि के कामना की है।
गोरखनाथ मंदिर में नेपाल के महाराज के जन्मदिन पर पूजा कर प्रसाद चढ़ाने की परंपरा रही है। राजशाही खत्म होने के बाद भी यह परंपरा चलती आ रही है। लेकिन अब कोरोना संकट के बीच मंदिर के मुख्य पुजारी ने नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र वीर विक्रम देव शाह निर्मल के महाराजगंज, काठमांडू निवास स्थल के नाम से पत्र शनिवार को भेजा है।
जिसमें उन्होंने लिखा है- आपके जन्मदिन के अवसर पर शिव अवतारी महायोगी गुरु गोरखनाथ को महाप्रसाद चढ़ाया जाएगा और आपके सुखमय जीवन की कामना की जाएगी। लेकिन भारत में कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण महाप्रसाद नहीं भेजा जाएगा। महामारी की स्थिति सामान्य होने पर महाप्रसाद भेजने की व्यवस्था की जाएगी। कमलनाथ महाराज ने पत्र में कहा है कि गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश ने गुरु गोरखनाथ से आपके दीर्घायु होने के कामना की है।

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नेपाल राजशाही परिवार से मंदिर का अटूट रिश्ता
नेपाल के राजशाही परिवार और गुरु गोरखनाथ मंदिर का रिश्ता अटूट है। कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद से ही राजशाही परिवार नेपाल में फला-फूला है। नेपाल में आज भी लोगों की आस्था गुरु गोरखनाथ में अटूट है। खिचड़ी के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु नेपाल से गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने आते हैं।

तीन बार आता है नेपाल से धन
नेपाल राजशाही परिवार से साल में तीन बार साल गुरु गोरखनाथ की पूजा के लिए धन आता है। जिससे खिचड़ी चढ़ाने, विजयदशमी तथा नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र विक्रम शाह के जन्मदिन के अवसर पर मंदिर में पूजा होती है। यहां से महाप्रसाद नेपाल राजशाही परिवार को भेजा जाता है।

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