Sun. May 24th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

मैं सागर हूं, मैं खुद की शरहदें जानता हूं.. : नन्द सारस्वत स्वदेशी

 

—-मैं सागर हूं—-

मैं सागर हूं,मैं खुद की शरहदें जानता हूं..
अपनी मौज में बहता हूं,खुद की हदें पहचानता हूं,

चाहूं तो कर सकता हूं जलजलाकार,
फैल कर मैं बन सकता हूं प्रलयंकार मगर
मै साहीलों से टकराकर खुद ही संभलता हूं.
क्यूंकि मैं अपनी लहरों को खुद पालता हूं
मैं सागर हूं, मैं खुद की शरहदें जानता हूं..

क्या देव,क्या दानव सब ने मिलकर मुझे लुटा
मगर फिर भी बहता रहा,मैं हरदम अटूटा
हालांकि मैंने अपनी मर्यादा कभी न लांघी
क्युंकि मैं मर्यादाओं को मान मानता हूं
मैं सागर हूं,मैं खुद की शरहदें जानता हूं

यह भी पढें   देशभर में भीषण गर्मी, सर्तक रहने का मौसम विभाग ने दी चेतावनी

मैं असहनीय आक्रोष और रोष से डर रहा हूं
मानव मल और गंदली नदियों से भर रहा हूं..
दोहन मेरा जारी है,मैं मेरी भावी को जानता हूं, इसलिए
गंदगी भरी नदियों को भी मैं खुब संभालता हूं
मैं सागर हूं,मैं खुद की शरहदें जानता हूं..

अनेकोनेक रत्न पा कर भी ये मानव मुझ में
बर्बादी का खारा गरल डालता मुझमें
ये मानवीय कर्म मानवता को खत्म न कर दें
बन कर तलातुम कभी कभी उफनता हूं मगर फिर शांत हो जाता हूं क्युंकि
मैं सागर हूं,मैं खुद की शरहदें जानता हूं..
अपनी मौज मे बहता हूं,अपनी हदें पहचानता हूं ।।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 22 मई 2026 शुक्रवार शुभसंवत् 2083
नन्द सारस्वत स्वदेशी –बेंगलुरु

नन्द सारस्वत स्वदेशी –बेंगलुरु

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *