हे देव, महादेव,तुम ही सूर्य, न उदय न अस्त, तुम अर्धेश्वर , तुम ही अहर्त : तूलिका
‘एक ओंकार’
हे देव, महादेव,
न आदि न अंत, तुम आकाश,
तुम ही पूर्णेश्वर, हे पिंग्लाक्ष,
न क्षय न वृद्धि, तुम नदीश,
मात्र तुम सम्पूर्ण, हे नटराज!!
तुम ही सूर्य, न उदय न अस्त
तुम अर्धेश्वर , तुम ही अहर्त ,
तुम कामना- न पूर्ण न रिक्त,
तुम ही अन्तक, हे अक्षतवीर्य!!
तुम ही सृष्टि, तुम ही प्रलय,
तुम ही महेश्वर, मृत्युंजय,
तुम ही वज्र तुम ही मृदु ,
तुम ही सर्वज्ञ, हे सामप्रिय!!
तुम ही आरम्भ, तुम ही इति ,
त्रयीमूर्ति तुम, भूतपति ,
तुम ही सुख –दुःख , सम्पद-विपद,
न संज्ञा न परिणति, हे उमापति !!
मिलन विरह तुम ही तो,
तुम ही अपयश-यश अपार,
तुम ही प्रारंभ , तुम ही विलय,
तुम ही अनंत, हे महाकाल!!
तुम ही प्रश्न ,कौतुकता , तुम ही
तुम ही सात्विक, शाश्वत, तुम्ही ,
तुम ही शक्य , हे त्रिशक्य,
तुम ही जिज्ञासा, जीवन रहस्य !!




