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हिमालिनी दिल्ली ब्यूरो द्वारा अंतरराष्ट्रीय काव्य सम्मलेन “एक शाम-भारत के नाम” आयोजित

 

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(हिमालिनी फ़ीचर डेस्क-दिल्ली) नई दिल्ली: 14 अगस्त:2020: भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हिमालिनी मीडिया समूह नेपाल एवं इन्द्रप्रस्थ लिटरेचर फेस्टिवल के संयुक्त तत्वावधान में हिमालिनी वर्ल्ड वाइड फेसबुक पटल पर “एक शाम-भारत के नाम” ऑनलाइन-अंतरराष्ट्रीय काव्य सम्मलेन एवं परिचर्चा का आयोजन हुआ. इस ऑनलाइन काव्य संध्या की रूप रेखा एवं मंच-संचालन हिमालिनी दिल्ली ब्यूरो प्रमुख पत्रकार-लेखक सुरेन्द्र सिंह डोगरा ने हिमालिनी पत्रिका मीडिया समूह-नेपाल के प्रबंध निदेशक सच्चिदानंद मिश्रा जी के सानिध्य में तैयार किया. गौरतलब है कि इस साहित्यिक वेबिनार का प्रसारण फेसबुक लाइव स्ट्रीमयार्ड्स माध्यम से कार्यक्रम की शुरुआत हिमालिनी पत्रिका मीडिया समूह-नेपाल से प्रबंध निदेशक सच्चिदानंद मिश्र जी के उद्घाटन संबोधन से हुई. मिश्रा जी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि हिमालिनी मीडिया समूह द्वारा पहली बार ऑनलाइन कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली से करने पर समस्त दिल्ली ब्यूरो-भारतीय टीम को बधाई दी. इस काव्य संध्या में सबसे पहले हिमालिनी पत्रिका की सम्पादक डॉ श्वेता दीप्ती (जो त्रिभुवन विश्वविद्यालय काठमांडू में कार्यरत शिक्षाविद साहित्यकार हैं) द्वारा ‘मेरी जन्म भूमि मेरी पहचान है, इस पर मेरा तन-मन कुर्बान है” प्रस्तुत कविता से हुई. इस ऑनलाइन काव्य संध्या-परिचर्चा में भारत के विभिन्न प्रान्तों से नामी-गरामी कवि-साहित्यकारों-लेखकों ने देशप्रेम से ओतप्रोत अपनी-अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की. जिनमें नारनौल-हरियाणा से प्रधानाचार्या-साहित्यकार डा. कृष्णा आर्या ने “ऐ सर्दी में फिरता होगा-मेरी माँ का जाया वीर”, इसके उपरांत विश्व विख्यात कवियित्री डॉ कीर्ति काले ने अपने चिर-परिचित बुलंद अंदाज-आवाज में अपनी कविता “भारत के वासी हम-हिन्द के निवासी हम-हमें अपने वतन पर अभिमान हैं” प्रस्तुत की. वहीँ मुंबई फिल्म नगरी से जुडी बॉलीवुड कलाकार-कवियित्री-मॉडल काजल चौधरी ने अपनी कविता की पंक्तियाँ “वो हर नागरिक सेना है-जिसने देश की गरिमा का गौरव माना है” प्रस्तुत की.
रूडकी-उत्तराखंड की छात्रा शायरा याक्षी यश ने भी अपनी कविता “है ये मेरा हिंदुस्तान-जिसने सब धर्म को अपनाया है” प्रस्तुत की. चंडीगढ़ शहर से जुडी राशि श्रीवास्तव जी ने अपने ओजस्वी गीत “हारेंगे वो हर बाजी-जब जिद्द पर हम आ जाएँगे, छोड़ेंगे न हम जब तक है हम में दम” प्रस्तुत किया. इसके बाद सेवानिवृत्त पंजाब नेशनल बैंक अधिकारी-लेखक मुकेश भटनागर जी ने हिंदी फ़िल्मी देशभक्ति गीत “ऐ मेरे प्यारे वतन-ऐ मेरे बिछड़े चमन-जूझ पर दिल कुर्बान, तू ही मेरी आरजू-तू ही मेरी आबरू-तू ही मेरी जान” बहुत ही सुरीली आवाज में सुनाया. जयपुर से जुडी मीडिया-शोधकर्ता अफिफा बैग ने “जवाब सोचा जाए” गीत “इस माशरे में ना जाने अब और होना क्या है,ना जाने कौन सा मंजर देखना पड जाए, अगर है हिम्मत और ना दो कायर तो आओ थोडा इन्सान बना जाए, ना बन सके वो भी तो इंसाफ के दिन-खुदा को देने के लिए जवाब सोचा जाए.” डी ए वी कॉलेज अम्बाला में कार्यरत प्रोफेसर डॉ रेखा शर्मा ने “जय हिन्द की सेना-कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक हुआ” प्रस्तुत किया .
नालागढ़ हिमाचल प्रदेश से प्रसिद्ध लेखिका-कवियित्री सुश्री प्रीति शर्मा ने भी देशभक्तिपूर्ण कविता “बसंती”-तू बसंती उनकी प्यार की कहानी बोलती है, जब तेरे रंग में खुद को रंग के देश का बच्चा बच्चा बोला था” वरिष्ठ साहित्यकार-लेखक-वीरेंद्र कुमार मंसोत्रा जी ने एक पंजाबी देशभक्ति गीत “ओखी घड़ी देश उत्ते जदों वीं पईं ताँ –दियाँ गे जान लूटा साथियों”, सुश्री मधु गोयल जी ने “भारत के मतवाले पंछी” नामक कविता पाठ-“मेरे देश के वीरों तुमको आगे बढ़ते जाना-दुश्मन की छाती पर मूंग दलते जाना है”, इंदौर, मध्य प्रदेश से डॉ. सुनीता श्रीवास्तव ने अपने देशप्रेम विचार व्यक्त किए, अम्बाला शहर से डॉ किरण जैन-अमर शहीदों की समाधि पर टेक रहे हैं माथा”, गुरुग्राम हरियाणा से कवियित्री मुक्ता मिश्रा जी ने “मैं केवल हूँ नहीं धड़कन” रचना प्रस्तुत की, देहरादून-उत्तराखंड से श्रिया कत्याल ने “खुद के लिए तो सभी जीते हैं –“कभी औरों के लिए भी जी के देखो”, तमिलनाडु से हिंदी विभागाध्यक्ष-डॉ.शेख अब्दुल वहाब ने-मनुष्यता की गंध नामक कविता “हम सब एक हैं बगिया के फुल जैसे,चाहे रंग अलग हों, सुंगध सम सब एक हैं, लेखक-कवियित्री सुश्री मीना कौशल ने-“मेरे देश की धरती कैसे कहूँ, मैं कितना तुझको प्यार करूँ, देहरादून उत्तराखंड नेशनल ब्लाइंड स्कूल में कार्यरत शारीरिक शिक्षा-अध्यापक कवि नरेश नयाल जी ने “तेरे बलिदान पर” नामक कविता के बोल कुछ इस तरह प्रस्तुत किए “सख्त हूँ, तटस्थ हूँ, मौन हूँ, मद मस्त हूँ, हाँ चूर हूँ, देश प्रेम का सिरमौर हूँ”, वरिष्ठतम साहित्यकार एवं ओजस्वी कवि-डॉ. जय सिंह आर्य ‘जय’-ने देशप्रेम पर अपनी पंक्तियाँ “आगे बढे तुम्ही तो, जब देश ने पुकारा, हर स्वास को लुटाकर, तुमने वतन को संवारा”, अम्बाला शहर से सुश्री मंजीत तुर्का ने अपनी देशभक्ति कविता –आओ हम फिर सब मिलकर स्वंतन्त्रता दिवस मनाते हैं” को बखूबी पेश किया, रूडकी, उत्तराखंड से याक्षी यश ने अपनी कविता “हाँ ये मेरा हिंदुस्तान हैं-जिसने सब धर्म को अपनाया है” देशभक्ति रचनाएँ प्रस्तुत कर ऑनलाइन कार्यक्रम माध्यम से देश-विदेशों से जुड़े साहित्य-प्रेमियों ने खूब प्रशंसा की. उक्त ऑनलाइन-अंतरराष्ट्रीय काव्य सम्मलेन एवं परिचर्चा का मंच संचालन एस.एस.डोगरा ने तथा तकनीकी सहयोग अमन चौधरी ने किया.

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