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पाठ्यक्रम विकास परिषद् के निर्णय से २६ हजार विद्यार्थी ११ कक्षा नहीं पढ पाएँगे

 
फाईल तस्वीर

माध्यमिक शिक्षा परीक्षा (एसईई) में नौ हजार से अधिक विद्यार्थी को औसत ग्रेड प्वाइन्ट (जीपीए) ४ आने के बाद विद्यालय के आन्तरिक मूल्यांकन की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ रहा है।

राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा गत सोमबार नतिजा सार्वजनिक किया गया था । जिसमें से ४ लाख ७२ हजार ७२ विद्यार्थी में से हजारौं विद्यार्थी  कक्षा ११ में नहीं पढ पाएँगे ।

शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्री गिरिराजमणि पोखरेल की अध्यक्षता में २८ सावन में हुए  राष्ट्रिय पाठ्यक्रम विकास तथा मूल्यांकन परिषद् की  बैठक ने एसईईमा अंग्रेजी, गणित और विज्ञान में ‘डी प्लस’ नहीं लाने वाले विद्यार्थी को कक्षा ११ में भरती नहीं करने का निर्णय किया है ।

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परिषद् के  निर्णय अनुसार एसईई में तीन विषय में ‘डी प्लस’ लाने से सिर्फ नही होगा । जीपीए भी १.६ लाना होगा । इस वर्ष इन दोनों मापदण्ड पुरा नही करने वालले विद्यार्थी करीब २६ हजार हैं।

कक्षा ११ में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित पढ्ने के लिए जीपीए १.६ के साथ ही अंग्रेजी, गणित और विज्ञान में ‘सी प्लस’ लाना होगा ।

२०७२ साल में ग्रेडिङ प्रणाली में जाने के बाद किसी भी विद्यार्थी के लब्धांकपत्र में ‘अनुत्तीर्ण’ नही लिखा जाता है । ९९  प्राविधिक विद्यालय ने २०७१ साल से ही एसईई के विद्यार्थी के लब्धांकपत्र में अनुत्तीर्ण लिखना छोड दिया गया है ।

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एसईई उत्तीर्ण के घर में अविरजात्रा और अनुत्तीर्ण के घर में शोक वाली अवस्था नही आने देने के लिए  अनुत्तीर्ण नही लिखने ग्रेडीङ प्रणाली अपनाया था । पर परिषद् ने न्यूनतम मापदण्ड निर्धारित होने के बाद कम जीपीए लाने वाले विद्यार्थी कक्षा ११ में नही पढ पाएँगे ।

‘कक्षा ११ में किसी भी  संकाय में नाम नही लिखाने के बाद तो  अनुत्तीर्ण जैसा ही है’ शिक्षाविद् मनप्रसाद वाग्ले का कहना है, ‘उनके लिए सरकार ने कोई विकल्प नही दिया है क्या वो लोग खाडी जाने देना है ?’

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इस वर्ष परीक्षार्थी को  पुरक ग्रेडबृद्धि परीक्षा का अवसर भी नही दिया गया है । गत चैत के लिए निर्धारित एसईई नही होने के बाद विद्यालय के आन्तरिक मूल्यांकन के  आधार में नतीजा प्रकाशन किया गया है ।

पाठ्यक्रम विकास परिषद् के निर्णय से हजारौं विद्यार्थी का भविष्य मुश्किल में पडने की बात शिक्षाविद् वाग्ले कहते हैं। उनका मानना है कि , ‘गुणस्तर के लिए अगर निर्णय किया गया है तो यह  २०७३ साल से ही लागु करना चाहिए, अभी लाया गया है इसे वापस लेना चाहिए   ।’

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