युवा शक्ति के प्रतीक और प्रेरणा-स्रोत आईपीएस मनु मुक्त मानव
नारनौल, 28 अगस्त, 2014 को
भारतीय पुलिस सेवा के युवा और प्रभावशाली अधिकारी मनुमुक्त ‘मानव’ की 30 वर्ष, 9 माह की अल्पायु में नेशनल पुलिस अकेडमी, हैदराबाद (तेलंगाना) के स्विमिंग पूल में डूबने से संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। स्विमिंग पूल के पास ही स्थित ऑफिसर्स क्लब में चल रही विदाई पार्टी के बाद आधी रात को जब मनुमुक्त का शव स्विमिंग पूल में मिला, तो अकेडमी में ही नहीं, पूरे देश में हड़कंप मच गया, क्योंकि यह अकेडमी के 66 वर्ष के इतिहास में घटित होने वाली पहली इतनी बड़ी दुर्घटना थी।
उल्लेखनीय है कि मनुमुक्त 2012 बैच और हिमाचल प्रदेश काडर के मेधावी और ऊर्जावान पुलिस अधिकारी थे। 23 नवंबर, 1983 को हिसार में जन्मे तथा पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से उच्च शिक्षा प्राप्त मनुमुक्त ने ‘सी’ सर्टिफिकेट सहित एनसीसी की सभी सर्वोच्च उपलब्धियां प्राप्त की थी। वह बहुत अच्छे चिंतक होने के साथ-साथ बहुमुखी कलाकार और सफल फोटोग्राफर भी थे; सेल्फी के तो मास्टर ही थे। उनकी समाज-सेवा में भी बड़ी रुचि थी। वह अपने दादा-दादी की स्मृति में अपने गांव में एक स्वास्थ्य-केंद्र तथा नारनौल में एक सिविल सर्विस एकेडमी स्थापित करना चाहते थे। देश और समाज के लिए उनके और भी बहुत सारे सपने थे, जो उनकी असामयिक मृत्यु के साथ ही ध्वस्त हो गए।
इकलौते जवान आईपीएस बेटे की मृत्यु मनुमुक्त के पिता प्रमुख साहित्यकार और शिक्षाविद् डॉ रामनिवास ‘मानव’ तथा माता अर्थशास्त्र की पूर्व प्राध्यापिका डॉ कांता के लिए भयानक वज्रपात से कम नहीं थी। कोई अन्य दंपत्ति होता, तो शायद टूटकर बिखर जाता। लेकिन ‘मानव’ दंपत्ति ने अद्भुत धैर्य का परिचय देते हुए, न केवल इस अकल्पनीय-असहनीय पीड़ा को झेला, बल्कि अपने बेटे की स्मृतियों को सहेजने और सजीव बनाए रखने के लिए भरसक प्रयास भी शुरू कर दिए। उन्होंने अपनी संपूर्ण जमापूंजी लगाकर मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट का गठन किया और नारनौल में ‘मनुमुक्त भवन’ का निर्माण कर उसमें लघु सभागार, संग्रहालय और पुस्तकालय की स्थापना की। ट्रस्ट द्वारा अढाई लाख का एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, एक लाख का एक राष्ट्रीय पुरस्कार, 21- 21 हजार के दो तथा 11-11 हजार के तीन राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय
पुरस्कार और सौ मनुमुक्त ‘मानव’ स्मृति-सम्मान प्रतिवर्ष प्रदान किए जा रहे हैं। ‘मनुमुक्त भवन’ में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नियमित रूप से चलते रहते हैं, जिनमें अब तक अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन,नार्वे, तुर्की, नेपाल, सिंगापुर, फीजी, मारिशस आदि एक दर्जन देशों की लगभग तीन सौ विशिष्ट विभूतियां सहभागिता कर चुकी हैं। मात्र अढाई वर्ष की अल्पावधि में ही अपनी उपलब्धियों के कारण नारनौल का ‘मनुमुक्त भवन’ अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित हो गया है।
मनुमुक्त ‘मानव’ युवा शक्ति के प्रतीक ही नहीं, प्रेरणा-स्रोत भी थे। 6 वर्ष बाद भी उन्हें बड़े सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है। परिवार ने मीडिया, सोशल मीडिया और फेसबुक के माध्यम से उनकी प्रेरक स्मृतियों को जीवित रखा हुआ है। इसके लिए मनुमुक्त की बड़ी बहन और विश्वबैंक, वाशिंगटन (अमरीका) की अर्थशास्त्री डॉ एस अनुकृति का भी भरपूर सहयोग रहता है।

