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भूख मिटाने असंगठित मजदुर फिर से पहुंचे सडक पर : अंशु झा

 
३० अगस्त, काठमांडू । कोभिड–१९ के खतरा से बचने के लिए लागु लकडाउन हंटने के बाद असंगठित मजदुर काम का खोज तलाश में लग गये थे । परन्तु पुनः निषेधाज्ञा जारी होने के बाद असंगठित क्षेत्र का मजदुर फिर से सडक पर पहुंच गये हैं । बजार का कार्य व्यापार बन्द हो जाने से मजदुर कामविहीन हो गये हैं । न तो उनके पास कोई काम है और न ही भोजन करने के लिए कोई सामग्री । बाध्यतावश अब मजदुर फिर से सडक पर पहुंच गये हैं । जी हां, काठमांडू के रत्नपार्क के पास बसपार्क में शाम को लगभग सात सौ मजदूरों को भोजन दिया जाता है । भोजन के लिए ही पांच सौ से सात सौ तक मजदुर रत्नपार्क में एकत्रित होते हैं ।
देहारी मजदुर सिन्धुपाल्चौक का कान्छा स्याङतान ने बताया कि वह पाँच महीना से बेकाम पडा है । उसने बताया कि बीच में लमडाउन हंटने के बाबजुद भी कोई ढंग का काम नहीं मिला । लकडाउन हंटने पर किसी प्रकार खाना का व्यवस्था कर लेते थे परन्तु निषेधाज्ञा होने से स्थिति पूर्ववत ही हो गई । स्यांगतान ने बताया कि इसी क्रम में रत्नपार्क में एक संस्था खाना बांट रही है वही खाने के लिए सडक पर पहुंचता हूं । उनका कहना है कि हम काम करना चाहते हैं, कृपया हमें काम दें ।
मजदूरों को हन्ड्रेड ग्रुप जैसी संस्थाएं भोजन करा रही है । खाना खाने के लिए काठमांडू घाटी के तीनों जिलाओं के मजदुर दोपहर तीन बजे ही रत्नपार्क पहुंच जाते हैं । हन्ड्रेड ग्रेप का संस्थापक अंशु यादव ने बताया कि मजदूरों को ४ बजे शाम में हमलोग खाना खिलाते हैं । उन्होंने बताया कि रत्नपार्क में लगभग सात सौ मजदुर जमा होते हैं खाने के लिए । उन्होंने बताया पहले पहले तो दो सौ से तीन सौ मजदुर ही आते थे परन्तु फिलहाल ७ सौ तक पहुंचते हैं । यादव ने बताया कि चैत १३ गते से ही हमलोग जरुरतमन्द के लिए भोजन अभियान शुरु किया जो अभी भी जारी है । पहले तो विभिन्न स्थानों पर जा जा कर खिलाते थे पर अभी एक ही जगह खिला रहे हैं ।
इसी प्रकार सडक में ही रहे होटल मजदुर पूर्णप्रसाद पाण्डे ने बताया कि हमें इससे पहले खाना खाने के लिए कोई तकलिफ नहीं थी, क्योंकि हम बागबजार के होटल में खाना बनाने का काम करते थे । परन्तु अभी तो होटल भी बन्द हो जाने से खाना के लिए भी विवश हो गये हैं । भूख मिटाने के लिए बाध्यतावश रत्नपार्क आते हैं । पाण्डे ने बताया कि हमारे तरह ही और जगहों पर भूखा मजदुर होगा । अगर उसे पता चल जाय कि यहां पर खाना मिल रहा तो वो भी आता । बहुत दूर दूर से भोजन के लिए यहां लोग आते हैं । इसी प्रकार बहुत सारे मजदुर इस अभियान को धन्यवाद देते हैं ।
हन्ड्रेड ग्रुप की संस्थापक यादव ने बताया कि इस भोजन अभियान में लाइन्स ग्रुप भी सहयोग कर रहे हैं । सडक में आने वाले मजदूरों को विभिन्न संस्था में आवद्ध सक्रिय युवाओं के सहयोग में हमलोग इस अभियान को जारी रखे हैं । संस्था का प्रतिनिधि खुद पैसा एकत्रित कर इस अभियान को निरन्तरता दे रहे हैं ।
लायन्स क्लव का प्रतिनिधि इन्द्रबहादुर कार्की ने बताया कि सामाजिक उत्तरदायित्व अन्तरगत मजदूरों का भूख मिटाने के लिए आवश्यक सहयोग करने लगा । उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि अगर सरकार मजदरों के लिए उचित व्यवस्थापन कर देती तो वह प्रभावकारी होता । उन्होंने बताया कि मजदूरों में सचेतना की कमी है । एक महीना तक एक ही मास्क प्रयोग करते । हाथ धोने में भी सजगता नहीं अपनाते जिससे सडक के मजदूरों में भी कोरोना संक्रमण दिखाई देने लगा है जो खतरनाक है । इस पर सरकार को तत्पर्यता दिखानी चाहिए ।

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