कोरोना मानव सभ्यता के लिए चुनौती भी और अवसर भी : देवकुमार यादव
सिरहा, ६ सेप्टेम्बर ।
कोरोना के कहर को नजर अन्दाज नहीं किया जा सकता है । यह वैश्विक माहामारी ने सारी दुनिया को अपने चपेट मे ले चुका है । मेडिकल साईन्स ईस से छुटकारा पाने के लिए दिनरात मेहनत कर रही है । एन्टी कोरोना टीका बनाने मे पूरे विश्व के वैज्ञानिक अभ्यास मे जुटे हैं । लगभग सारे देशों की आर्थिक अवस्था चरमरा गयी है । सरकार द्वारा घोषित लकडाउन के कारण गरीब मजदूर दो वक्त का रोटी जुटाने में दिन रात एक कर रही है । नेपाल के अगर वर्तमान सरकार की बात करें तो लगभग सरकार फेल नजर आ रही है । कोरोना सबके आगे एक बडी चुनौती की तरह सामने खडा है ।
लेकिन अगर कोरोनाकाल के सकारात्मक पहलुओं की बात करें तो यह भी बडी चौकानेवाले है । पिछले ६ महीने में कोरोना महामारी के चलते प्रायः सभी समाज में आश्चर्यजनक बदलाव आया है। सगाई, शादी, जन्मदिन, सालगिरह जैसे खुशी के मौके पर होने वाले आयोजनों में लाखों रुपये खर्च होते थे। अब वे भव्य आयोजन मात्र परिवार तक सिमटकर रह जाने से आर्थिक बोझ से मुक्ति मिल गई है। साथ ही तमाम तामझाम के बजाय सादगी से समारोह होने लगे हैं, समाजजनों, रिश्तेदारों को आमंत्रित न कर पाने से पैदा हुई नाराजगी भी दिखाई नहीं दे रही है। इन बदलावों को समाजजनों ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया है। किसी भी समाज में विरोध का स्वर नहीं उठ रहा है। जिन नियमों को बदलने पर समाज के पदाधिकारी आपस में उलझते थे, वे अपने आप खत्म होते नजर आ रहे हैं। कोरोनाकाल पुर्व समाज में मृत्यु भोज की परंपरा चल रही थी। कोरोना महामारी में यह परंपरा खत्म हो गई।
अब किसी भी समाज में तेरहवीं का आयोजन नहीं किया जा रहा है। मृत्यु के बाद शांति बैठक में संपूर्ण समाज के लोग शामिल होते थे। प्रतिदिन मेहमान, रिश्तेदार शोक जताने आते थे। अब ऑनलाइन सांत्वना बैठक में शोक संतत्प लोगों को ढाढस बंधा रहे हैं। गांव से लेकर शहरों तक शादी समारोहों में नाच, गाने का भव्य आयोजन होता था। अब दूल्हा-दुल्हन के परिजन मात्र फेरे लेने की रस्म निभा रहे हैं। संगीत संध्या का तामझाम पूरी तरह से खत्म हो गया है।किसी भी शादी समारोह में मात्र २५ मेहमान शामिल होने के नियम से अब हजारों लोगों को भोजन पर आमंत्रित करने का झंझट खत्म हो गया है। लाखों रुपये का खर्च भी बचने लगा है। हर धर्म के लोग किसी भी पर्व-त्योहार को मनाने के लिए धर्म की आड़ लेकर भव्य जुलूस, शोभायात्रा निकालते थे। अब किसी भी धर्म के पदाधिकारी जोर-जबरदस्ती, दबाव नहीं डाल रहे। घर पर ही त्योहार मना रहे हैं। लोग प्रकृति और प्राकृतिक भोजनका आनन्द लेरहें है । होटल, बियर बार, ढाबा बन्द होने कि वजह से नशेवाज लोग अपने आदत सुधार्ने मे लगे है । यातायात कम होने से वातावरण भी सन्तुलन के अवस्थामे आरही है । दिनभर घर परिवार के साथ रहने के कारण लोगोमे पारिवारिक आत्मीयता बढरही है । चाहे जो भी हो कोरोना ने हमे जीवन जिनेका नयाँ आधार और मापदण्ड दिया है । जागरुक रहे और स्वस्थ रहें । धन्यवाद । ( लेखक : देवकुमार यादव नेपाल पत्रकार महासंघका केन्द्रिय सदस्य है ।)

