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चीन भारत का कितना हितैषी –

 

सियाराम पांडेय ँशांत’
चीन भारत के लिए खतरे का सबब बना हुआ है । नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका को भारत के खिलाफ भडÞकाने और इस निमित्त उन्हें सुविधाओं का लालीपाँप दिखाने में उसका कोई सानी नहीं है । वह इन देशों को शस्त्रास्त्रों के क्षेत्र में तकनीकी मदद भी कर रहा है । सच तो यह है कि  वह भारत के खिलाफ चौतरफा चक्रव्यूह का निर्माण कर रहा है लेकिन इसके बाद भी भारतीय हुक्मरां उसके चरित्र को समझने की जहमत तक नहीं उठा पा रहे हैं ।
पाकिस्तान में परमाणु कार्यक्रम के जनक अब्दुल कादीर खान का अपनी पत्नी हेनी को भेजा गया गोपनीय पत्र चीन के भारत विरोधी आचरण की पोल खोलने के लिए काफी है । लंदन के संडे टाइम्स में छप चुके इस पत्र में कहा गया है कि चीन ने ही पाकिस्तान को परमाणु कार्यक्रम बनाने के फार्मूले दिए । दो परमाणु बम बनाने भर यूरेनियम दिया और परमाणु बम बनाने में प्रयुक्त  होने वाली विशेष गैस भी उपलब्ध करवाई । अब्दुल कादीर पर आरोप है कि उन्होंने उत्तर कोरिया, लीबिया और्रर् इरान को परमाणु तकनीकी बेची थी लेकिन कादीर की मानें तो यह सब तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो और उनके सुरक्षा सल्लाहकार इम्तियाज खान के इशारे पर हुआ था । अगर परमाणु वैज्ञानिक कादीर की बातों में रंच मात्र भी सच्चाई है तो चीन का भारत विरोधी चेहरा सहज ही सामने आ जाता है । भारत ने जब पोखरण में पाँच परमाणु परीक्षण किए थे तो पाकिस्तान ने छह । यह सब सुलभ हुआ था चीन के सहयोग से । चीन और पाकिस्तान की नजदीकी जगजाहिर रही है । चीन हमेशा ही पाकिस्तान को हथियारों की आपर्ूर्ति करता रहा है । अब तो माफिया डाँन दाउद इब्राहिम ने भी चीन से संबंध बढÞाने शुरु किया है । इससे अवैध असलहों, मादक द्रव्यों और जाली नोटों की खेप का नेपाल और चीन के रास्ते भारत पहुंचना बेहद सरल हो जाएगा और यह स्थिति भारत के लिए कितनी मुफीद होगी, इस बारे में सोचने-विचारने की संभवतः किसी के भी पास फर्ुसद नहीं है । सउदी अरब के विमान में चीनी हथियारों का कोलकाता में पकडÞा जाना और फिर चीन का आंखें तरेरना इस बात का प्रमाण तो है ही कि उसे विमान सेवा के अंतर्रर्ाा्रीय कायदे-कानून की रत्ती भर भी परवाह नहीं है ।
चीन अंतर्रर्ाा्रीय सीमा रेखा पार कर भारत में घुस गया । बात यहीं तक होती तो भी गनीमत थी । उसने भारतीय मानबिंदुओं का ध्यान किए बगैर उसकी पहचान से भी छेडÞछाडÞ की और अब वह उत्तराखंड में घुसपैठ कर रहा है की सीमा में डेढÞ किलोमीटर तक भारत चीन ने अपने नाम की मुहर लगा दी । अपने सैनिकों को भेजकर पहाडÞो को लाल करा दिया ।
जब चीन के एक विशेषज्ञ ने हिंदुस्तान के कई टुकडे करने की बात कही थी तब केन्द्र सरकार को अपना बल याद भी आया था । उसने नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री प्रचण्ड को संयम बरतने और चीन के हाथों न खेलने का सीधा संदेश भी दिया था। नेपाल की सीमा से लगते श्रावस्ती जिले के पेडÞो पर नेपाली ध्वज फहराए जाने की भारत सरकार ने पुरजोर निंदा की थी, लेकिन चीन के मामले में वैसा कुछ नहीं हुआ । चीन की आलोचना के मामले में भी यूपीए सरकार फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है । ऐसा क्यों है, यह तो वही बेहतर बता सकती है । लेकिन देश की इस कमजोरी का विदेशी ताकतें बेजा इस्तेमाल करेंगी, इस सच से इंकार नहीं किया जा सकता । जाहिर है, इससे पडÞोसी देशों का मनोबल बढेÞगा । इसमें संदेह नहीं कि चीन कभी भारत का सगा नहीं बन पाया । जब कभी भारत ने उसकी ओर दोस्ती का हाथ बढÞाया, किसी भूभाग पर भी उसकी नापाक नजर रही ।
अरुणाचल प्रदेश समेत भारतीय सीमा क्षेत्र में अंतर्रर्ाा्रीय सीमा रेखा का अतिक्रमण चीनी सैनिकों ने वर्ष२००८ में ही २२३ बार किया है । चमोली के छोटे से इलाके बाराहोती में भी इस साल गर्मियों के दौरान चीनी फौज दो बार घुस आई थी । लाल सेना के जवानों ने वहाँ ऐसे प्रमाण भी छोडेÞ, जिसके आधार पर चीन यह साबित कर सके की यहाँ उसका निर्बाध आवागमन होता रहता है और यह क्षेत्र उसी का है । चीनी फौजों की इस नापाक हरकत की केन्द्र सरकार को तुरंत जानकारी दे दी गयी थी । खुफिया ब्यूरो, सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस और राज्य सरकार की खुफिया एजेंसियों ने इस बारे में जो जानकारियां साझा की हैं और केन्द्र सरकार को जो रिपोर्ट भेजी हैं, उनमें साफ कहा गया है कि चीनी फौज लगातार घुसपैठ कर रही है । तिब्बत से सटे इलाके में ४०-५० किलोमिटर लंबी सीमा पर कोई बस्ती नहीं है । वहां कोई तारबंदी भी नहीं है । र्सर्दियों में वहाँ बर्फजमी रहती है । भारतीय फौज और भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवान वहाँ मोर्चा संभाले हैं । एक खुफिया अधिकारी के मुताबिक यहाँ कई विवादित क्षेत्र हैं । इस पर प्रधानमंत्री से लेकर कैबिनेट और सचिव स्तर पर कई बार दोनों देशों के बीच बातचीत होती रही है । यह ऐसा इलाका है, जहाँ वर्ष१९६२ के भारत-चीन जंग के बाद घुसपैठ तो खुब हर्ुइ, लेकिन दोनों तरफ की फौजों ने गोलियां चलाने में हमेशा संयम दिखाया ।
अंतर्रर्ाा्रीय सीमा रेखा को लेकर दोनों में विवाद की स्थित लंबे समय से चली आ रही है । चीन यह मानता है कि अंग्रेजों ने उसके एक कमजोर शासक पर दबाव बना कर मैकमोहन रेखा को अंतर्रर्ाा्रीय सीमा रेखा घोषित करवा दिया था । २००१ में भारत और चीन ने परस्पर नक्शों का आदान-प्रदान भी किया था । वेर्स्र्टन सेक्टर -पर्ूर्वी जम्मू-कश्मीर) में कराकोरम दर्रर्ााौर चिपचैप नदी के बीच समर लुंगपा के दक्षिण इलाके पर भी चीन अपना दावा करता रहा है । चिपचैप नदी के दक्षिण में टि्रग हाइट्स और प्वाइंट ५४९५ तथा ५४९५ है । चीनी सैनिक इस इलाके में लगातार घुसता हैं । उन्होंने मानशेन हिल का नाम प्वाइंट ५४९५ रख रखा है । टि्रग हाइट्स के दक्षिण पर्ूव में स्थित इलाका दपसांग रिज भी विवादास्पद रहा है। चीन जा रहे सउदी अरब के असलहा लदें विमान का कोलकाता में पकडÞा जाना भी किसी गहरी साजिश का हिस्सा हो सकता है । चीन की साम्राज्यवादी सोच सुरक्षा की तरह बढÞ रही है ।
पडÞोसी देशों में उसकी अनाधिकृत घुसपैठ को कमोवेश इसी रुप में देखा जा सकता है । वह जिस तरह नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान की भारत विरोधी सोच को हवा दे रहा है, यह इस बात का द्योतक है कि उसे आह्यान और हृवेनसांग के सपनों का गौरवशाली भारत पसंद नहीं है । पडÞोसी देशों की सामरिक महत्व की जमीनों को हथियाने की उसकी कोशिशें परवान चढÞ रही है । पाकिस्तान की इच्छा से ही सही, पश्चिमी क्षेत्र में हथियाई गई १३०० वर्ग किलोमिटर भारतीय भूमि को पाकिस्तान से पाकर वह फूला नहीं समा रहा है । वहाँ उसने कराकोरम मार्ग विकसित कर लिया है । यह स्थिति भारत के लिए बहुत मुफीद नहीं है । चीन के सैनिकों ने न केवल लद्दाख में अंतर्रर्ाा्रीय सीमा का उल्लंघन किया है बल्कि वहाँ पत्थरों और चट्टानों पर अपनी भाषा में ‘चीन’ भी लिख दिया है । यह सब यह अपना पक्ष मजबूत करने के लिहाज से कर रहा है ।
चीन का अंतर्रर्ाा्रीय सीमा जाने वाले माउंटग्या के पास भारतीय क्षेत्र में करीब डेढÞ किलोमीटर तक घुस आना और ‘फेयर प्रिंसेज आँफ स्नो’ के तौर पर प्रख्यात माउंटग्या को चीन का हिस्सा बताने की लिखित कोशिश करना आम भारतीय के दिल पर कोदो रगडÞने जैसा है । यह जम्मू-कश्मीर में लद्दाख, हिमाचल प्रदेश में स्फीति और तिब्बत को जोडÞने वाला तिराहा है । गौरतलब है कि सीमा पर गश्त करने वाले दल को ३१ जुलाई को पता लगा कि जुलंुग ला दर्रर्ेेे आसपास अनेक चट्टानों और पत्थरों पर ‘चीन’ लिखा गया था ।
अकेले अगस्त महीने में चीन के सैनिक पूरे लाव-लश्कर के साथ ही नहीं, पूरे २४ बार माउंटग्या क्षेत्र में घुसे । डेढÞ किलोमीटर से अधिक इलाके को चीनमय कर देना एक दिन में संभव नहीं है । इससे पता चलता है कि भारत पर अंतर्रर्ाा्रीय दबाव बनाने और अंतर्रर्ाा्रीय सीमा रेखा के मामले में उसे झूठा साबित ठहराने के लिए चीन किसी भी हद तक जा सकता है । भारतीय सीमा में घुसपैठ के बाद भी चीन नहीं चाहता कि सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय सेना की हलचल बढेÞ । अगर चीन के साथ भी घुसपैठ के मामले में पाकिस्तान जैसा व्यवहार नहीं किया गया तो वह एक बार फिर १९६२ का इतिहास दोहरा सकता है । देश के हुक्मरानों को यह बात जितनी जल्दी समझ में आ जाए, देश उतना ही फायदे में रहेगा ।
-लेखक अमर उजाला लखनऊ में मुख्य उप संपादक है ।)

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