मत रोको , मत रोको इन आंसुओं को बहने दो : कमला भन्साली जैन
मत रोको, मत रोको ,इन आँसुओंको बहने दो।
मूक नयन की भाषा को ,
आकुल हृदय की परिभाषा को ।
कुछ कह लेने दो।
भीतर की सारी वेदना ,
आंसुओं की स्याही लिखती है।
पगली पीड़ा की झलक , इन
आंसुओं में ही दिखती है ।
वेदना के पाषाणों को ,
आंसुओं की मंदाकिनी में ,
गलने दो ,धुलने दो।
मत रोको , मत रोको इन
आंसुओं को बहने दो ।
कमला भन्साली जैन।
राजबिराज ।

