जागो बहिनों, आलस तजकर आगे कदम बढ़ाना है : कमला भन्साली जैन
जागो बहिनों,
जागो बहिनों, आलस तजकर आगे कदम बढ़ाना है।
पथ में लगने वाली ठोकर से ,
किंचित नहीं घबराना है।
स्वतंत्रता की परिभाषा बन ,
कुछ ऐसा कर दिखलाओ।
परतंत्रता को भूल हृदय से,
घट घट में जागृति फैलाओ।
जागो बहिनों, जाग उठी हो,
अब वापस नहीं सोना है।
व्यर्थ रुढियों के विवाद में,
समय नहीं अब खोना है ।
पूरब में हर रोज नया अब,
सूरज हमे उगाना है।
इस स्वर्णिम अवसर को ,
सुंदर सपनों को संजोने है ।
साहस की शक्ति से हम,
युग की धारा को बदलेंगे।
जलते एक दीप से जलकर,
लाखों लाखों दीप जलेंगे।
अत्याचारों के आगे हम,
कभी न शीश झुकाएं।
आओ, हम सब बहिनें,
मिलकर यह आवाज उठाएं।
हम किसी से कम नहीं हैं,
सबको पाठ पढ़ाना है।
,कमला, श्रम की बूंदों से ,
जीवन को चमकाना है।
श्रम, सेवा, सहनशीलता,
है नारी की पहचान।
अडिग मनोबल से ,
कर देती हर मुश्किल आसान।
कमला भन्साली जैन ।

