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प्यार,सम्मान,पूजा की अधिकारिणी है बेटी : इन्दु तोदी

 

कोमल सा एहसास है बेटी,

रौनक,खिलखिलाहट है बेटी

आनन्द का आभास है बेटी
,
सुख दे दुःख समेट लेती है बेटी

करती नही कभी कोई मांग बेटी

आँशु छुपा हँसने का हुनर रखती
है बेटी,

लाखों दर्द दबा ससुराल में खुश हूँ
कहती है बेटी,

त्याग प्रेम सहनशीलता की भण्डार
है बेटी

माँ बाप की कुशलता जानने को सदा
आतुर रहती है बेटी,

मायके का हाल जान न पाने से दुःखी
हो जाती है बेटी,

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अब कहाँ निश्चिन्त हो सो जाया करती
है बेटी,

घर में कहाँ बरकत हो पाती है बिना बेटी

हर पल सब के सुख दुःखका सोचती
है बेटी,

नही रखती सुधबुध विवाह के बाद खुद की
बेटी,

जब सब हंसते है खुश हो हँसलेती है बेटी,

सारे जहान में उजाला बिखेरती है बेटी,

दो दो कुल का नाम रोशन करती है बेटी,

वहां कभी प्रभू कृपा नहीं बरसा करती,
जहाँ दुःखके आँसु गिरा दिया करतीं है बेटी

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कितने ही पुण्य के प्रताप से घर जनम लिया
करती है बेटी,

साक्षात उमा रमा ब्रम्हाणी का रुप है धरती पे,

प्यार,सम्मान,पूजा की अधिकारिणी है बेटी ।।

इन्दु तोदी , धरान

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