Sun. Jul 19th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

महात्मा गान्धीजी के प्रति श्रद्धाञ्जली स्व. हरिश्चन्द्र शाही

 

किताबों के पन्ने से

महात्मा गान्धीजी के प्रति श्रद्धाञ्जली

स्व. हरिश्चन्द्र शाही (वि.स.१९४८–२०३०)

१– भारत के प्राण ! महात्मा गान्धी ।

गारत के त्राण कर परतन्त्र भारत को ।

सिधारे हाय ! घोर संकट काल में !

तजफर, इस स्वतन्त्रता के बालक को ।।

२– स्वराज वृक्ष दृढ जमने भी न पाया,

विपत्ति चारों ओर मंडराने लगी ।

धीरता, दूर्दर्शिता के कारण,

प्रगति पथ से बाधायें टलने लगीं ।।

३– राष्ट्र के पिता ! पथ–प्रदर्शक आप थे

यह भी पढें   वरिष्ठ नागरिक अगुवा एवं पूर्व अर्थमन्त्री डॉ. देवेंद्र राज पांडेय का निधन

सन्मार्ग दिखाएगा, अब कौन हमें ?

स्वराज रुपी रत्न, जवाहर  को सौंप

कर्तब्य पूर्ण कर, विश्राम लेने चले !

४– अहिंसा के सच्चे पुजारी आप थे ।

विश्व शान्ति के दिव्य प्रचारक आप थे ।।

सत्य के तो मानो प्रतीक ही आप थे ।

हिन्दू–मुस्लिम मेल की कुञ्जी आप थे ।।

५– धन्य ! कर्मवीर ! अहिंसा रुपी अस्त्र से,

लिया स्वराज आप ही ने, भारत में ।

दिखाया चमत्कार आत्मिक–बल का,

घोर हिंसात्मक स्वार्थमय जग में ।

यह भी पढें   एमाले सांसदों का च्यासल में अन्तरक्रिया

   

६– मनुज जाति की निष्पक्ष सेवा करना,

जीवनका लक्ष और महान ब्रत था ।

अन्तिम सयमय तक, आदर्श कर्मयोगी !

सदा दृढ ब्रत पालन, आप ने किया था ।

७– निष्काम कर्म–योग की उत्तम शिक्षा,

आप सदृश कर्मयोगी ने हमें दी है ।

अमूल्य स्वराज–फल, हम सब को खिलाया ।

किन्तु अर्जित फल स्वयं अपने न खाया है ।।

८– श्रेष्ठ कर्म करने से नरलोक में,

नर से नारायण भी बनते हैं ।

यह भी पढें   बाढ़ और भूस्खलन के कारण देश भर के विभिन्न सड़कें अवरुद्ध

कुकर्म करने से ही धराधाम में,

नर से हाय ! नराधम भी बनते हैं ।।

९–जग में अजर–अमर हुआ नाम जिसका,

मरकर भी वह नरश्रेष्ठ मरता नहीं ।

दुर्लभ मानव तन पाकर क्या हुआ ?

जो स्वदेश और परहित मरता नहीं ।।

स्व. हरिश्चन्द्र शाही (वि.स.१९४८–२०३०)

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

1 thought on “महात्मा गान्धीजी के प्रति श्रद्धाञ्जली स्व. हरिश्चन्द्र शाही

  1. एक नेपाली द्वारा रचित यह एक अच्छी कविता है बापू के नाम । लकिन प्रस्तुति की असावधानी साफ दिखाई पड् रहा है । कृपया बापू के सम्मान और कविता का सदुपयोग हेतु इस काे फिर आकर्षक प्रस्तुति के साथ पेश करें ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *