Wed. Jul 22nd, 2026
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हाथरसः योगी की परीक्षा : डॉ. वेदप्रताप वैदिक

 

*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* हाथरस में हुए बलात्कार के कारण देश में वैसा ही रोष पैदा हो रहा है, जैसा कि निर्भया-कांड के समय हुआ था। बल्कि मैं तो यह कहूंगा कि निर्भया-कांड से भी अधिक दुखद और भयंकर स्थिति का निर्माण हो रहा है। यदि यह कोरोना महामारी का वक्त नहीं होता तो लाखों लोग सारे देश में सड़कों पर निकल आते और सरकारों को लेने के देने पड़ जाते। यह ठीक है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुस्तैद किया है और योगी ने तुरंत सारे मामले की जांच के लिए विशेष कमेटी बिठा दी है लेकिन सारे मामले में हाथरस की पुलिस और डाक्टरों के रवैए ने सरकार की प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगा दिया है।

पुलिस और सूचना विभाग के कुछ अधिकारियों के विरुद्ध भी कुछ कार्रवाई हुई है लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस अधिकारियों ने जो बर्ताव किया, उसके कारण इन दोनों भाई-बहनों की छवि तो चमकी ही, प्रशासन के रवैए पर भी कई प्रश्न चिन्ह भी लग गए। सबसे पहले तो यही प्रश्न उठा कि एक सप्ताह तक इस बलात्कार की शिकायत पुलिस ने दर्ज क्यों नहीं की ? स्थानीय अस्पताल ने उस युवती के इलाज में इतनी लापरवाही क्यों बरती ? दिल्ली के एक अस्पताल में उसका निधन हो जाने पर पुलिस ने उसकी लाश को रात में ही फूंक डाला और उसके परिवार से कोई सहमति तक नहीं ली गई। किस डर के मारे पुलिस ने यह अमानवीय खटकरम कर डाला ? सबसे शर्मनाक बात यह हुई कि पीड़िता की जांच के बाद कहा जा रहा है कि उसके साथ बलात्कार के कोई प्रमाण नहीं मिले। उस युवती ने खुद बलात्कार की बात कही और उन नर-पशुओं के नाम बताए। क्या मरने के पहले उसने जो बयान दिया, उस पर संदेह किया जा रहा है ? उन नर-पशुओं ने उस युवती की कमर की हड्डी तोड़ दी, जुबान काट ली और उसके अधमरे शरीर को उसके दुपट्टे से घसीटा गया। उसकी लाश पर घासलेट डालकर उसको जला दिया गया और उसकी अस्थियां अभी तक वहीं पड़ी हुई हैं। उसके परिवार को नजरबंद कर दिया गया। उनके मोबाइल फोन पुलिसवालों ने जब्त कर लिए, ताकि वे बाहर के लोगों से बात न कर सकें। उस परिवार से किसी भी पत्रकार को नहीं मिलने दिया जा रहा है। एबीपी चैनल के कई पत्रकारों ने गज़ब का दमगुर्दा दिखाया है। प्रतिमा मिश्रा, रुबिका लियाकत, अंजलि और केमरामेन मनोज अधिकारी के लाख प्रयत्नों के बावजूद उन्हें उस परिवार के पास नहीं जाने दिया गया। पुलिसवालों ने बहाना बनाया कि जांच कमेटी काम कर रही है। इसीलिए न तो पत्रकारों को वहां जाने दिया गया और न ही परिवार के किसी सदस्य को बाहर आने दिया गया। ऐसा लगता है कि हाथरस की पुलिस और प्रशासन स्वयंभू है, संप्रभु है, सर्वोच्च है। यह स्थिति उप्र सरकार की प्रतिष्ठा को धूमिल कर रही है। यदि योगी सरकार अपनी घोषणा के मुताबिक अपनी पुलिस के खिलाफ अत्यंत सख्त कदम नहीं उठाएगी तो वह न सिर्फ अपने लिए खतरा पैदा कर लेगी बल्कि सारी भाजपा सरकारों के भविष्य को खटाई में डाल देगी। यह योगी की सबसे गंभीर परीक्षा का समय है। योगी से आशा की जाती है कि वे बलात्कारियों और पुलिस के विरुद्ध इतनी सख्त कार्रवाई करेंगे कि वह दूसरे मुख्यमंत्रियों के लिए मिसाल बन जाए।

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