जय माँ शैलपुत्री : निशा अग्रवाल
जय माँ शैलपुत्री
पूजते हैं क्यों दुर्गा को
क्योंकि शक्ति उनमें सन्निहित है
नारी तो वो भी हैं
फिर क्युं वो महिमामंडित है।
अंश तुम भी उसी का हो
तुममें भी शक्ति वो ही है
भावनाओं के भँवर में क्युं
तुम खुद को बिसरे बैठी हो।
भय किसका है तुमको
किसने तुमको रोका है
निज अस्तित्व निज हाथों से
क्युं तुम बिखेरे बैठी हो।
सच्चाई औ आत्मबल की
ले हाथों में तुम कृपाण
मार्ग प्रशस्त करो अपना
कर लो मुठ्ठी में जहान।
नवरात्र का ये पावन पर्व
नारी के विजय की गाथा कहता है।
हर रुप में तु ही पूजित है
तुझसे ही तो आशीष का झरना बहता है।
कौन तुझे कुछ दे सकता है
अन्नपूर्णा, लक्ष्मी, सरस्वती तु ही तो है।
हाथ मत फैला अपने अतंर को जगा
आंरभ हो या हो अंत, तु ही तो है।
केवल तु इक देह नही
न वस्तु कोई भोग की
तु हरि का प्रसाद है
औषध है हर रोग की
जबतक तु खुद को पहचानेगी नही
कोई तुझे क्युं देगा पहचान
पैर भी तेरे जमीं भी तेरी
पंख भी तेरे आस्मां भी तेरा
भर ले मनचाही उड़ान
भर ले मनचाही उड़ान।।।।।

धरान

