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जनकपुर का १०वर्ष मे रुपान्तरण की जिम्मेवारी पत्रकारों के हाथ ।

 

janakpur ka१३,अप्रिल,जनकपुर,कैलास दास । जनकपुर का भविष्य १० वर्ष मे कैसे रुपान्तरण किया जाय इस विषय पर पत्रकार और मानव अधिकारविदो के बीच विशेष विचार विमर्ष का आयोजन किया गया है । विश्व का मानचित्र पर जनकपुर एक धार्मिक पर्यटकीय और मनोरम स्थल के रुप मे देखा जाता है । चारो दिशा मे मठ मन्दिर  देवी देवताओं का अपना ही महत्व है । यहाँ पर प्रत्येक वर्ष धार्मिक साँस्कृतिक मर्यादा को कायम राखने के लिए बडे बडे पर्व को आयोजना किया जाता है ।  खास कर कहा जाए तो विवाहोत्सव, रामनवमी, विजया दशमी, छठ पर्व जैसे कइ सारे पर्व मानाया जाता है जिसे देखने के लिए नेपाल और भारत से ही नही बल्कि खाडी देश से भी पर्यटक उत्सुकता पूर्वक आते है । लेकिन जनकपुर की जितनी उच्चाई है उतना ही यह छोटा दिखता है । कहने का मतलव यहाँ का राजनीतिक विचार, स्थानीय लोगों की आवाज एवं मर्यादित सिद्धान्त, राज्य पक्ष द्वारा अपहेलित है ।

अगर हम पिछे की ओर देखते है तो १०० वर्ष पुराना जनकपुर और अभी के जनकपुर मे विकासीय परिवर्तन बिलकुल नही के बराबर हुआ है । और न ही परिवर्तन करने की सोच किसी मे दिखती है ।  भले ही पहले के अनुपात मे यहाँ की जनसंख्या घनत्व बढा है, गन्दगी की चर्चा देश भर फैली है, यहाँ का दर्शनिक स्थल अतिक्रमण वा लुप्त हुआ है, राजनीतिक हस्तक्षेप के वजह से विकास के लिए आए रकम दुरुपयोग किया गया है । अगर ऐसा ही जनकपुरके  प्रति यहाँ के बुद्धिजीवि, युवा एवं नागरिक समाज तथा राजनीतिकर्मी का सोच रहा तो कल के दिनो मे बडा अफसोच के साथ कहना पडे सकता है कि जनकपुर सीता की जन्म भूमि नही, पुरुषोत्तम राम का ससुराल नही तथा यहाँ जनक का दरबार भी नही था ।

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एक कहावत है अन्धेरे का विरोध करने से अच्छा अन्धेरे मे एक दीप जला देना बहादुरी है । अगर सच मे हमारे राजनेता जनकपुर को परिवर्तन करना चाहते हैं तो कुर्सी खेल के आन्दोलन के साथ ही शैक्षिक परिवर्तन, जनकपुर की सौन्दर्यीकता का आवाज, कला साँस्कृतिक का संरक्षण को लेकर अगर राजनीतिक का एक भी अंग वा भातृ संगठन इस तर्फ कार्य करती है १० वर्ष के अन्तर मे जनकपुर कैसा होगा अनुमान लगाया जा सकता है ।janaki mandir

जनकपुर १० वर्ष मे कैसा होना चाहिए इस के लिए आइडिया क्रिएट कर सभी वर्ग इस मे सामेल होकर एक अभियान ही चलाना होगा । अर्थात ‘रुपान्तरण या परिवर्तन के लिए एक अभियान’ चलाना चाहिए । टेक्नीकल एडभाइजर हुमनराइटस एण्ड इन्भाइरोमेन्ट डेभोलोपमेन्ट सेन्टर के आर.सी. लामीछाने ने बातचीत कार्यक्रम मे बताया की जब तक जनकपुर के प्रति हरेक निकाय का साकारात्मक सोच नही होगा तब तक जनकपुर मे परिवर्तन असम्भव है । इस लिए आज से ही हमे कल्पना करना होगा की १० वर्ष के बाद जनकपुर कैसा होना चाहिए । प्रत्येक क्षेत्र मे रुपान्तरण की आवश्यकता है । चाहे विद्यार्थी वर्ग हो, किसान हो, व्यापारी हो, या आम नागरिक सभी मे विचार विकास के लिए साकारात्मक सोच होना चाहिए ।

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उन्होने यह भी कहा कि जनकपुर की सम्पदा को बचाने के लिए जनकपुर मे आए ‘राजर्षी जनक विश्वविद्यालय’ अब समाप्त  होने जा रहा है, अगर वह जनकपुर मे नही बन सका तो जनकपुर फिर से १०० वर्ष पिछे हो जऐगा । परिवर्तित समय और प्राविधिक युगमे अगर पिछे पड गए तो विकास, कृषि, शिक्षा, व्यापार सब के सब मरुभूमि हो जाऐगा और  अल्प समय मे अकाल से जुझते जुझते मर जाऐगे ।

आज आवश्यकता है, वैज्ञानिक तरिके से खेती कैसा किया जाए । बढती आवादी और प्रदूषण से कैसे बचाए जाए । शिक्षा की दिशा विदेशी के साथ कैसे मर्ज किया जाए । अगर हम सबसे डेभोलोप कन्ट्री अमेरिका की बात करते है तो वहाँ का प्रत्येक नागरिक परिवर्तन के विचार वाले है । वहाँ का नागरिक विचार क्रिएट करते है और दुसरे देश मे विचार के निर्माण मे परिवर्तन करके वे शक्तिशाली बने है । इसलिये सबसे पहले हमे विचार क्रिएट करके अपना ही देश, क्षेत्र मे निर्माण करना होगा ।

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मानव अधिकारवादी बुद्धनारायण सहनी के अध्यक्षता मे हुआ विचार विमर्ष कार्यक्रम मे बाताया गया कि ‘रुपान्तरण के लिए अभियान’ का प्रारम्भ पत्रकारो द्वारा किया जाए । जनकपुर विकास के लिए जनकपुरवासी मे सकारात्मक सोच कैसे लाया जाए पत्रकारिता क्षेत्र से प्रारम्भ हो । प्रत्येक क्षेत्र से १० वर्ष का जनकपुर कैसा होना चाहिए साकारात्मक सोच लेकर अपने ही कलम से प्रारम्भ करके आगे लाये ।

विचार विमर्ष कार्यक्रम मे रेडियो मिथिला तथा मिथिला डटकम के समाचार संयोजक सुजीत कुमार झा, कान्तिपुर टेलिभिजन के महोतरी समाचारदात अमरकान्त अमर, पत्रकार वीरेन्द्र रमण, धैर्यकान्त दत्त, उपेन्द्र भगत नागवंसी सहित ने जनकपुर रुपान्तरण अभियान के विषय मे विचार व्यक्त किया था ।

अब देखना है की इस अभियान को पत्रकार कितना पालन करते है और कितना यहाँ के जिम्मेवार व्यक्ति ।

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