जनकपुर की रोती बिलखती बागवानी
जनकपुरधाम | नेपाल के प्रदेश नंबर दो के राजाधनी जनकपुर के रामानंद चौक स्थित “उष्ण प्रदेशीय बागवानी नर्सरी जनकपुर धाम” जो आम जनसमुदाय और किसानों के लिए इस प्रदेश का इकलौता नर्सरी है, इसकी भौतिक अवस्थको देखकर कृषिप्रधान देश नेपाल के आधार भूमि खण्ड मधेस के केंद्र भूमि जनकपुर और मधेस सरकार के रूप में सम्मानित प्रदेश दो के सरकार की उदासीन मांसौकता को प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। दस बीघा भूमिखंड में फैले यह बागवानी, नर्सरी मधेसी किसान के लिए वरदान से काम नहीं है, पंचायत काल में यह अपनी पूर्ण गरिमा और महिमा को प्राप्त था। परन्तु प्रजातंत्र और गणतंत्र ने इसे मरुभूमि में परिणत कर दिया है। नेतागण अपनी झोली भरने में हीं व्यस्त हैं। उन्हें सार्वजनिक सम्पत्ति को संवारना नहीं वल्कि लूटना सिखाया गया है। नहीं तो कृषि के लिए सर्वोत्तम भूमि में कृषकों के लिए आधुनिक भौतिक तालीम, उन्नत खाद, बीज, फल फूल लगायत हजारों किसिम के सुविधाओं से युक्त यह बागवानी आज अपनी दीनता पर रोती नजर आ रही है। बागवानी के अति कर्मठ रिटायर्ड कर्मचारी केवल ठाकुर जी, जिन्हें रिटायर्ड पश्चात भी लाखों किसानों को सुविधा पहुंचाने के लिए आग्रह कर प्राविधिक सहयोग लिया जा रहा है, का कहना है कि एक सीजन में हम इतनी असुविधाओं के बावजूद भी कमसेकम तीन लाख बीज उत्पादन कर हजारों किसानों को सुविधा पहुंचा देते हैं। मैं खुद वहां से फल, फूल, और तरकारी के पौधे लाया करता हूं। लेकिन बाढ़ और वर्षा के पानी के कारण बहुतों बार खाली हाथ भी लौटना पड़ता है। इसी क्रम में उस बागवानी के दूसरे प्राविधिक कर्मचारी श्री लक्ष्मीनाायण झा जी से बात करने पर पता चला कि रामानंद चौक के नाला को न खोलने के कारण समस्या और बढ़ गया है। बाढ़ और वर्षा के जल जमाव के कारण कीमती पौधे नष्ट हो जाते हैं। हम लोग चाहकर भी किसानों को सुविधा न पहुंचा पानेपर क्षुब्ध हो जाते हैं। प्रदेश सरकार को चाहिए कि इसपर विशेष रूप से ध्यान दे। गाहिराई के कारण हजारों टिपर मिट्टी की आवश्यकता है, एकही बार छ कर्मचारी रिटायर्ड हो जाने के कारण भी समस्या आ पड़ा है। अत्याधुनिक औजारों की भारी कमी है।एक दो पावर ट्रेलर के अलावा कुछ नजर नहीं आया। जबकि वह बागवानी अत्याधुनिक कृषि मसिनो से लैस होना चाहिए, ता कि किसानों को तालीम देने में सुविधा होती। हजारों किसानों के लिए वह बागवानी आज भी एक भरोसे और विश्वास का केंद्र है। अन्य कृषि कार्यालयों से कहीं हजार गुणा प्रत्यक्ष सुविधा और फल देनेवाला यह बागवानी सरकारी उपेक्षा का केंद्र बनना मधेसी किसान और नागरिक के लिए दुर्भाग्य का विषय है। बाज़ार में उपलब्ध अविश्वसनीय तथा महंगी बिजो की तुलना में सयों गुणा उच्च गुणवत्ता युक्त तथा अत्यधिक सस्ता मूल्य में किसानों के लिए उपलब्ध भरोसेमंद फलफूल तथा सब्जियों के बीज का खुद मैं भी अनुभव से समर्थन करता हूं। बागवानी के कर्मचारी श्री कुशेश्वर सलहैता जी के अनुसार “यहां प्रयुक्त सभी बीज जापानी हाइब्रिड ही प्रयुक्त होता है, जिसे हम बाज़ार से महंगे दामों में खरीदकर लाते हैं, और किसानों को अति न्यून मूल्यों में उपलब्ध कराते हैं।” उनकी इन बातों का मैं स्वयं साक्षी हूं। अति मधुर स्वाभाव के धनी बागवानी प्रमुख श्री विष्णुकांत झा तथा इस बागवानी के कर्मचारी लोग सदैव किसान को सम्मान और सहयोगात्मक दृष्टि से देखते हैं। किसानों के सेवा में समर्पित इस बागवानी को आधुनिकता प्रदान करना सरकार का परम कर्तव्य होना चाहिए।
सरकार से निवेदन है कि वह इस विषय को गंभीरता से ले। विश्व में प्रयुक्त आधुनिकतम कृषि औजारों से बागवानी को संपन्न करे और बागवानी को कृषक के लिए प्रयोगात्मक अनुभव का केंद्र बनाएं। कृषि से संबंधित सभी कार्यालयों को किसान के लिए प्रयोगात्मक तालीम केंद्र के रूप में व्यवस्थापन कर मधेस और मधेसी के प्राण वायु कृषि क्षेत्र को एक आदर्श और प्रेरक स्वरूप देने का अविलंब प्रयास किया जाय।
जब सिंह दरबार को गांव गांव में पहुंचा दिया गया है तो उसके अधिकार और कर्तव्य को जनजन तक पहुंचाया जाना चाहिए। नेपाल है तो नेपाली है, और मधेस है तो मधेसी है। मधेसियों की संपन्नता उसके प्राकृतिक संपदा कृषि और बन पैदावार तथा जड़ीबूटियां है। मधेस सरकार के पास करोड़ों मधेसी को नौकरी देने तथा पालने का सामर्थ्य नहीं, है, इसी हालात में स्वरोजगार और स्वावलंबन योजना को सफल बनाने का काम कृषि उत्पादन और लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर करोड़ों युवाओं के जीवन शैली में सुधार लाया जा सकता है।
संघीय शासन प्रणाली को जनता के सर्वाधिक करीब प्रणाली माना जाता है, अतः प्रदेश सरकार को अपनी व्यक्तिगत सुविधको त्यागकर आम नागरिकों के जीवनस्तर को उठाने के लिए सक्रिय रहना चाहिए। ध्यातव्य हो! नेपाल में संघीय शासन प्रणाली सिर्फ और सिर्फ मधेसी समुदाय को ही चाहिए। बांकी के सभी समुदाय संघ के विरोध में थें और आज भी है। संघ को बर्खास्त करने की योजना को लेकर आंदोलनरत है। ऐसी स्थिति में एक प्रदेश नंबर दो ही है जहां की जनता संघ को बनाए रखना चाहती है। मधेसी जनता के इस संघीय मनोविज्ञान का अबतक मधेसी नेता लोग भावनात्मक रूप से धोखा देते आएं हैं। मधेसी जानता यदि मधेस सरकार में भी दीनहीन रही, तो सरकार के है विरोध में नहीं वल्कि व्यवस्था के विरुद्ध उठ रहे आवाज को बुलंद करने में पीछे नहीं रहेगी।यह मधेसियों का आजतक का राजनैतिक मनोविज्ञान भी है।
अतः प्रदेश दो के मधेस सरकार को चाहिए कि वह आम नागरिक के सरोकार से सम्बंधित सभी केंद्रों और संस्थाओं को पूरी तरह सक्रिय करने का प्रयास करे। हर प्रकार के तालीम को व्यावहारिक रूप में लागू करे। आम जन जीवन से सीधा सम्बन्ध रखने वाले सभी पहलुओं की पहचान कर उसके व्यज्ञानिक पक्षों को सर्वसुलभ बनाने पर ध्यान केंद्रित हो। क्षमतावान दक्ष नागरिक ही देश का भविष्य होता है, अतः इस भाव को संपुष्ट करने हेतु पाठ्यक्रम में संशोधन और युवाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन हेतु प्रयास हो। जनकपुर के बागवानी मधेसियों के लिए एक मजबूत प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। बुद्धिमान लोग मिट्टी को सोना में परिवर्तन करने का जज्बा रखते हैं, जबकि हम सोना को मिट्टी बनाने में अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं।




