कुम्भ मेला२०२१ : क्या आप जानते हैं कि हरिद्वार गंगा घाट का नाम हर की पौड़ी क्यों पड़ा
हर की पौड़ी का नाम आपने कई बार सुना होगा और शायद आप में से कई लोग यहां गए भी हों। जब भी कुंभ स्नान का जिक्र आता है तब हर की पौड़ी का नाम भी लिया जाता है। करोड़ों तीर्थ यात्री कुंभ स्नान करने के लिए हर की पौड़ी पर आते हैं। क्या आप जानते हैं कि हर की पैड़ी का प्राचीन नाम उज्जैन के राजा भर्तृहरि के नाम पर था। पहले इसका नाम भर्तृहरि की पैड़ी था। इसे हर की पौड़ी भी कहा जाता है। तो आइए जानते हैं कि इस जगह का नाम हर की पौड़ी कैसे पड़ा।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भर्तृहरि ने अपना राजपाट त्यागकर हर की पौड़ी के ऊपर वाली पहाड़ी पर कई वर्षों तक तपस्या की थी। जिस रास्त से उतरकर भर्तृहरि गंगा स्नान के लिए आए थे वहां पर भर्तृहरि के भाई राजा विक्रमादित्य ने सीढ़ियां बनवाई थीं। इन सीढ़ियों को भर्तुहरि ने पैड़ी का नाम दिया था। जिसके बाद से ये पैड़ियां हर की पौड़ी के नाम से विख्यात हुईं। भर्तृहरि के नाम में हरि भी मौजूद है जिसके चलते इस जगह को हर की पौड़ी कहा जाता है। इस पर्वत के नीचे भर्तृहरि के नाम से एक गुफा भी मौजूद है।
हर की पौड़ी वही जगह है जहां समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश से अमृत छलक कर गिर पड़ा था। कहा जाता है कि वैदिक काल में इसी स्थान पर श्रीहरि विष्णु और शिवजी भी प्रकट हुए थे। वहीं, इसी जगह पर ब्रह्माजी ने एक प्रसिद्ध यज्ञ किया था। यहां पर हर शाम गंगा आरती की जाती है। यहां पर देश-विदेश के पर्यटक इस आरती को देखने के लिए इक्ट्ठा होते हैं।

