मधेशवादी दलों का एक ही चुनावचिन्ह

अनिल झा:देश में फिर एक बार संविधानसभा का चुनाव हो रहा है। यह चुनाव राजनीतिक दलों और समाज के लिए एक अवसर भी है। इसका सदुपयोग होना चाहिए। मधेश का अधिकार अभी प्राप्त नहीं हुआ है। इसीलिए मधेश के हक और अधिकार प्राप्ति के लिए मधेशवादी दलों का एक होना आवश्यक है। आगामी संविधानसभा चुनाव तक मधेशवादी दलों का जहाँ तक सम्भव हो, एक पार्टर्ीीनाना चाहिए। वह सम्भव न हो तो एक मोर्चा बनाना चाहिए। लेकिन पार्टर्ीीे बदले मोर्चा को चुनाव में जाना चाहिए। मधेशवादी दल मोर्चा बनाएंगे तो उस मोर्चे के अन्दर मधेशवादी पार्टर्ीीो रहना चाहिए। चुनाव चिन्ह भी मोर्चा का ही होना चाहिए, पार्टर्ीीा नहीं।
मधेशवादी दल अलग-अलग पार्टर्ीीलग-अलग चुनावचिन्ह लेकर चुनाव में गए तो किसी को फायदा नहीं होगा। इसीलिए एक ही झण्डा और एक ही चुनाव चिन्ह के लिए प्रयास हो रहा है। इसकी सम्भावना है, इसलिए प्रयास भी शुरु किया गया है। आम मधेशी जनता और मधेशी कार्यकर्ताओं में चुनाव में मधेशी दल एक होकर उतरंे, ऐसी चाहना है। उस विषय में कुछ वार्ता भी आगे बढी है। लेकिन अभी भी बहुत कुछ गृहकार्य करना बाँकी है। किसी सिद्धान्त और विचार के आधार पर मधेशवादी दल अलग-अलग नहीं हुएं है। क्योकि सबों का सिद्धान्त एक हीं है।
मधेशवादी दलों का एक ही चुनाव चिहृन और एक ही पार्टर्ीीनाने का सिद्धान्त मधेशी जनता के व्यापक हित में केन्द्रित है। मधेशी जनता का र्सवकालीन और दर्ीघकालीन हित को केन्द्रित करते हुए सभी मधेशवादी दलों का एक ही मोर्चा बन सकता है। मधेशवादी दलों में एक ही घोषणापत्र, एक ही प्रकार का विधान और एक ही प्रकार की संरचना है और उद्देश्य भी एक ही प्रकार का है तो मोर्चा एक ही क्यों नहीं हो सकता – विगत में अनेकों प्रकार के जोडÞ-घटाव हुए। आरोप-प्रत्यारोप भी हुए। लेकिन अब विगत की बातों को हम लोग बिसार दें। यस संसार बहुत ही परिवर्तनशील है। इसलिए विगत को भुलाकर नये तरिके से आगे जाना होगा।
हम लोग गजेन्द्रनारायण सिंह के अनुयायी है। मधेश और मधेशी जनता के व्यापक हित के लिए मैं यह कह रहा हूँ। इस में किसी किसी प्रकार का आग्रह-पर्ूवाग्रह रखना आवश्यक नहीं है। किसी को आगे बढÞाने के लिए या किसी को समाप्त करने के लिए अथवा किसी को बिगाडÞने के लिए यह प्रस्ताव मैंने प्रस्तुत नहीं किया है। जो-जो मधेश हित और अधिकार के लिए राजनीति कर रहे हैं, वे सभी समग्र रुप से एक जगह में सम्मिलित होकर चुनाव में उतरंे।
विगत में सरकार में हम लोग थे। सरकार में कौन नहीं था – पिछली सरकार में उपेन्द्र यादव, न भी रहे हों तो विगत में किसी न किसी रुप में सरकार में तो वे सहभागी थे हीं। तमलोपा अध्यक्ष महन्थ ठाकुर लोकतन्त्र के बाद सरकार में नहीं रहने पर भी विगत में वे भी सरकार में गए थे। जिन पार्टियों को सरकार में जाने का अवसर मिला, वे सरकार में गए। इसीलिए मधेश में सरकार के बारे में न जानेवाला व्यक्ति शायद ही कोई होगा। सभी अपनी मर्जी से सरकार में गए थे। किसी को जाने का अवसर नहीं मिला तो यह बात दूसरी है। इसलिए विगत में कौन सरकार में था, कौन नहीं था, इसका आधार लेना उचित नहीं है। सरकार में जाने के लिए ही पार्टर्ीीोली जाती है और सरकार में जाने पर मन्त्री, प्रधानमन्त्री बनने के लिए ही कोई भी व्यक्ति राजनीति करता है। तर्सथ सरकार में जाना कोई अपराध नहीं है और गलती भी नहीं है।
चुनाव का मुद्दा संघीयता
आगामी चुनाव में मुख्य मुद्दा संघीयता ही होगा। चुनाव संघीयता में केन्द्रित होगा। विगत में संघीयता के प्रति कांग्रेस, एमाले, माओवादी की भूमिका कैसी रही, संघीयता का स्वरुप किस-किस दल ने कैसे आगे बढÞाया, इन सब बातों को मधेशी जनता देखेगी। मधेशवादी दलों के प्रयत्न द्वारा ही संघीयता में आत्मर्समर्पण नहीं किया गया, ऐसा उन लोगों को लगा है। आगामी संविधानसभा का चुनाव संघीयता के हिसाब से एक प्रकार से जनमत संग्रह जैसा ही है। इसलिए संघीयता प्रति कमजोर दृष्टिकोण रखनेवाले दलों पर मधेशी जनता विश्वास नहीं करेगी। संघीयता मधेशी आन्दोलन द्वारा स्थापित मुद्दा है। इसीलिए पहचान सहित की संघीयता के मुद्दे से मधेशी जनता किसी भी अवस्था में पिछे हटने की अवस्था में नहीं है। मधेशी, मुस्लिम, थारु सभी समुदाय अभी संघीयतावादी शक्ति के रुप में उभरे हैं। वे एक जगह में खडÞे होकर संघीयता के पक्ष में अपने विचार को आगे बढÞा रहे हैं।
नेतृत्व जिसका भी हो
नेतृत्व के विषय में मेरा कोई आग्रह-पर्ूवाग्रह नहीं है। जिसके नाम में सहमति होगी, उसीके नाम में नेतृत्व होना चाहिए, मेरा यह कथन है। मेरा एक मात्र आग्रह है कि मधेश में वृहत्तर एकता का प्रयत्न होना चाहिए। लेकिन उस में पार्टर्ीीा नाम क्या हो, अध्यक्ष कौन होगा, पार्टर्ीीा चुनाव चिहृन क्या होगा – इत्यादि प्रस्ताव में मेरा कोई आग्रह नहीं है। इन सब बातों को अगर मैं बाहर लाता हूँ तो और को इसे मानना ही चाहिए, ऐसा मेरा कहना नहीं है। मेरा कोई प्रस्ताव नहीं है, मैं नेता की दौडÞ में भी नहीं हूँ, मधेश की वृहत्तर एकता के लिए कल को अगर कोई मुझ से कहता है, आप पार्टर्ीीें न रहें, पार्टर्ीीोड दें, नागरिक समाज में बैंठे, तो उसके लिए भी मैं तैयार हूँ।
मधेशवादी दल एक होकर कितनी सीटें प्राप्त होगें, इस में मुझे कुछ नहीं कहना है। मैं जनता की भावना की बात कर रहा हूँ। मैंने मधेश का पूरा भ्रमण किया। मन्त्री पद से हटने पर किसी जगह में मैं एक बार और कहीं दो बार पहुँचा हूँ। मधेशी जनता की भावना यही है।
अगहन में चुनाव होना चाहिए
किसी भी अवस्था में आगामी अगहन में चुनाव होना चाहिए। सम्भव हो तो उससे भी पहले ही होना चाहिए। यह सरकार चुनाव के लिए ही गठित है। इससे चुनाव कराना चाहिए। सरकार को अपना दायित्व पूरा करना चाहिए। इस सरकार ने क्या किया, क्या नहीं किया, वह अलग बात है। लेकिन यह सरकार चुनाव के लिए ही बनी है, यह स्पष्ट है। तर्सथ, चुनाव की मिति घोषित करके चुनाव में जाना जरूरी है। हम लोग चुनाव में जाने के पक्ष में हैं। सभी दलों को जनता में जाना चाहिए। इसीलिए इस सरकार को माने या नमाने, उससे भी महत्त्वपर्ूण्ा बात है, चुनाव करने के लिए यह सरकार बनी है। आखिर चुनाव करने के लिए कोई न कोई सरकार होना ही चाहिए, तर्सथ सरकार को अपना चुनावी दायित्व पूरा करना चाहिए। त्र
-झा संघीय सद्भावना पार्टर्ीीे अध्यक्ष हैं)

