मैं उत्तराखंड का नाम देश-दुनिया मे रौशन करना चाहती हूँ -आरजे रौशनी खण्डूरी

आज उत्तराखंड के युवा मीडिया के क्षेत्र में भी खूब नाम कमा रहे हैं इसी कड़ी में पहाड़ों की रानी-मंसूरी की बाला भी अपनी मनमोहक आवाज एवं अंदाज की बदौलत बेहद लोकप्रियता हासिल कर रही है आप भी रेडियो ख़ुशी पर उनकी अंदाजे-बयाँ सुनकर दांतों तले ऊँगली दबा लेगें. जी हाँ हम बात कर रहें आर जे रौशनी खण्डूरी की. पिछले दिनों हिमालिनी ब्यूरो प्रमुख दिल्ली-एस.एस.डोगरा ने आरजे रौशनी खण्डूरी का साक्षात्कार किया. प्रस्तुत हैं बातचीत के अंश:
आप कहाँ की रहने वाली हैं?
मैं मसूरी-गढ़वाल उत्तराखंड निवासी हूं
आपने शिक्षा कहाँ से ग्रहण की?
मेरी प्रारम्भिक शिक्षा मसूरी के ही स्कूल गर्ल्स इंटर कोलेज से हुई है ओर बारहवीं के बाद कॉलेज मैंने देहरादून में मैंने बी.ए. ओनर्स-मास कम्युनिकेशन में इंस्टिट्यूट ऑफ़ मीडिया मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से किया.
मीडिया क्षेत्र में शुरुआत कैसे हुई?
मैंने नेटवर्क 10 में इंटर्नशिप की उसी दौरान मुझे साधना प्लस में रिपोर्टर बनने का अवसर प्राप्त हुआ फिर मैंने दैनिक जागरण,I Next, अमर उजाला के साथ काम किया. मैने डी एन एन चैनल में न्यूज़ एंकर, वीडियो एडिटिंग के पद पर भी काम किया है इसके साथ साथ मैंने फ्रीलांस वॉइस ओवर आर्टिस्ट , एक्टर , एंकरिंग के तौर पर भी काम कर रहीं हूँ |
आपको मीडिया क्षेत्र में आने के लिए कहाँ से प्रेरणा मिली?
मैं हमेशा से ही टीवी चैनल की मशहूर एंकर बरखा दत्त से बहुत ज्यादा प्रभावित रही जब भी मैं tv देखती तो हूबहू उनकी तरह बोलने की कोशिश किया करती थी और जब मैं 9th में थी तब मैंने सोच लिया था कि मैं tv पर आना चाहती हैं और मुझे एंकर बनना है फिर मैंने इसके लिए जानकारी जुटाई ओर बारवीं पास करने पर मैंने अपने घरवालों से मास कम्युनिकेशन करने की इच्छा जाहिर की – तो पापा चाहते थे मैं लौ की पढ़ाई करूँ ओर मा चाहती थी मैं होटल मैनेजमेंट करूँ मैने होटल में जॉब की कुछ समय के लिए लेकिन मैंने साथ साथ एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी शुरू कर दी दिल्ली यूनिवर्सिटी में मेरा चयन हो चुका था पर उस समय निर्भया केस होने की वजह से घरवालों ने मना कर दिया बहुत जिद करने पर घरवाले देहरादून में मेरा एडमिशन करने के लिए राजी हुए फिर मैंने एजुकेशन लोन लेकर पढ़ाई करी और साथ साथ पार्ट टाइम जॉब होटल में जारी रखी .रेडियो में जॉब करने के लिए घरवालो ने पूरा साथ दिया मेरे टीचर रिश्तेदार दोस्त भी आज गर्व महसूस करते हैं
आज आप कैसा महसूस करती हैं ?
मुझे आज इस बात की खुशी है कि मैं जिंदगी में जो मुकाम हासिल करना चाहती थी वो मैंने किया और निरन्तर इसके लिये आगे भी प्रयास करती रहूंगी.
अपने व्यक्तित्व को क्या मानते हैं ?
मुझे मल्टी टैलेंटेड कहलाना अच्छा लगता है. घूमना-फिरना, नए लोगों से मिलना जो शौक मेरा पब्लिक रिलेशन और मार्केटिंग में पूरा हो जाता है क्योंकि मैं फ्रीलांस काम भी करती रहती हूं |
अभी आप किस मीडिया हाउस के लिए कार्य करती हैं?
वर्तमान में मैं मंसूरी स्थित रेडियो खुशी 90.4 FM पर रेडियो जॉकी के पद पर कार्यरत हूँ जंहा पर शुरुआत मैने हिंदी शो के साथ मे की लेकिन जब हमारे स्टेशन डारेक्टर अर्जुन कैंतुरा जी को पता चला कि मैं गढ़वाली हूँ तो उन्होंने मुझे गढ़वळि शो करने का मौका दिया इसके लिए मैं उनकी शुक्रगुजार हूं क्योंकि वही से मेरे लिए ये एक टर्निंग पॉइंट रहा लोगो ने मेरी आवाज़ को गढ़वळि में बहुत पसंद किया सोशल मीडिया के माध्यम से भी जो वीडियो डॉक्यूमेंट्री रेडियो खुशी के ज़रिये लोगों तक पहुंची जिनमे 18 के आसपास पलायन से जुड़ी थी जो लोगों को बहुत पसंद आया और लोकप्रिय भी हुआ. इसके अलावा देश के जवानों के लिए,होटेलियर ओर अलग अलग टॉपिक पर कविताये लोगों तक पहुचाई गयी डियर दादी लो,बल हम तो सैर में रहतें है,सड़क आयी बेधड़क जैसे लेख काफी वायरल हुए. मैं यंहा पिछले तीन सालों से कार्यरत हूँ जिसमे हमारा उद्देश्य यही है कि हम लोगों तक अपनी संस्कृति परम्परा से जुड़ी जानकारियां लोगों तक पहुंचा सके कोविड काल के दौरान हमने ग्राउंड लेवल पर लोगों से फोन लाइन के जरिये उनकी समस्याएं सुनी जो लोग स्वरोजगार से जुड़े हैं उनको लोगों के सामने उजागर कर प्रोत्साहित किया और समय समय पर हमारे जो लोकगायक कवि और जो भी समाज मे अच्छा काम करते हैं उन्हें समय समय पर साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जाता है
हमारी अपनी बोली भाषा मे हर रोज गढ़वळि भाषा मे कार्यक्रम रोजाना 1:30pm से 4:30pm आता है रंगीलो गढ़वाल मेरो छबिलो कुमाऊँ. अभी हिंदी शो कर रही हूं यूनिवर्सल डायरीज 10:30am to 1:30pm
कम्युनिटी रेडियो की महत्वता पर आपके क्या विचार है?
कम्युनिटी रेडियो स्टेशन की अगर बात की जाए तो एक आम जनमानस की जिंदगी में आपदा के समय रेडियो के मुख्य भूमिका होती है कहीं न कही उस समय हमारी जिम्मेदारी ओर बढ़ जाती है साथ ही रोजमर्रा की जिंदगी में भी रेडियो मनोरंजन का एक प्रमुख साधन है. हम पिछले 8 सालों से लगातार उत्तराखंड के विरासत ओर इतिहास के हर पहलू पर बात करके उसे आम जनमानस तक पहुंचाते हैं . रेडियो गार्डन ऐप के माध्यम जैसे विश्व के किसी भी कम्युनिटी रेडियो स्टेशन को आप अपने घर बैठे सुन सकते हैं. सच में रेडियो से मनोरंजन के अलावा अपार जानकारियां भी प्राप्त की जा सकती है इसलिए कह सकते हैं रेडियो हमारे जीवन का अभिन्न अंग है|
युवाओं के लिए कुछ खास सन्देश
जी, मैं सभी युवा वर्ग से यही कहना चाहती हूं कि वो अपने माता पिता का सहारा बने वेस्टर्न कल्चर को अपनाना अच्छी बात है पर अपनी बोली, भाषा, संस्क्रतिव् संस्कार से जुड़ें रहें. और मेरे हिसाब से अगर आप कम समय मे अच्छा पैसा कमाना चाहते हैं तो मेहनती युवाओं के लिए ये एक अच्छा अवसर हो सकता है . इसके अलावा माता पिता भी अपने बच्चों का सपना पूरा करने में उनका सहयोग करें
आपकी क्या अभिलाषा है?
मेरा सपना है कि मैं उत्तराखंड का नाम देश दुनिया मे रौशन करूँ अपनी बोली भाषा के दम पर दुनियाभर में नाम कमाऊं.

