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जागो बहिनों!आलस तजकर- आगे कदम बढ़ाना है : कमला भन्साली जैन

 

“अन्तर राष्ट्रीय नारी दिवस पर कविता”

जागो बहिनों!आलस तजकर,
आगे कदम बढ़ाना है।
‘नारी शक्ति’के परचम को ,
शिखरों हमें चढ़ाना है।।
1,स्वतंत्रता की परिभाषा बन,
कुछ ऐसा करके दिखलाओ,
परतन्त्रता को भूल हृदय से,
घट-घट में जागृति फैलाओ।
पथ में लगने वाली ठोकर से-
किंचित नहीं घबराना है।
जागो बहिनों आलस तजकर
आगे कदम बढ़ाना है।।
2,सुप्त चेतना जाग उठी तो,
अब वापस नहीं सोना है।
व्यर्थ रूढ़ियों के विवाद में,
समय नहीं अब खोना है।
मर्यादा, अनुशासन, शिक्षा,
सेवा का अनुपम पाठ पढ़ाना है।।
जागो बहिनों !आलस तजकर
आगे कदम बढ़ाना है।।
3,साहस की शक्ति से हम ,
बदलेंगी युग की धारा।
स्वस्थ बनाना नारी समाज को,
अम्बर तक यह गूँजे नारा।
पूरब में हर रोज हमें अब,
सूरज नया उगाना है।।
जागो बहिनों! आलस तजकर,
आगे कदम बढ़ाना है।।
4,अत्याचारों के आगे हम,
कभी न शीश झुकायेंगे।
“अंतर राष्ट्रीय नारी दिवस”पर,
मिलकर आवाज उठायेंगे।
जलते एक दीपक से बहनों,
लाखों दीप जलाना है।।
जागो बहिनों!आलस तजकर
आगे कदम बढ़ाना है।।
5,श्रम, सेवा, सहनशीलता,
नारी की है प्रमुख पहचान।
अडिग मनोबल से कर देती,
वह , हर-एक मुश्किलों को आसान।
के
“कमला’श्रम की बूंदों से,
जीवन को चमकाना है।।
जागो बहिनों!आलस तजकर-
आगे कदम बढ़ाना है।।

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कमला भन्साली जैन। राजबिराज।नेपाल।

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