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स्वयंभू देव है श्री नाग ढैशंरी जी , ऐसी शक्तियों के भण्डार, जो करते है भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण

 

 पंचवीर सहित कई देवी देवता रहते है हर समय सुरक्षा में ।

 

हिमाचल प्रदेश जिला मण्डी उपमण्डल करसोग से लगभग 42 किलोमीटर रानीकोट के आँचल में समुद्र तल से करीब 5500 फुट की ऊंचाई पर बसा है, श्री नाग ढैशंरी जी का भव्य मंदिर । नाग ढैशरी अनेक अलौकिक शक्तियों के स्वामी है ।
नाग ढैशरी जी को च्वासी क्षेत्र के प्राचीन देवों में से माना जाता है । नाग ढैशरी जी के बारे में जनश्रुतियों, बुद्धिजीवियों तथा बुजुर्गों का मानना है कि किसी समय जैई गांव में दो परिवार रहते थे । उसमें एक व्यक्ति बोल नहीं पाता था (अर्थात वह गूंगा था ) । वह वहां पर रोज पशुओं को जंगल चराने ले जाता था । उन पशुओं में एक गाय भी थी । वह गाय रोज दोपहर को जंगल से भाग जाती थी और ढैशर धार में पहुंच जाती थी । जब वह व्यक्ति शाम को पशुओं को घर की ओर ले जाता था तो वह गाय भी घर की ओर आ जाती । जब शाम को गाय से दूध निकाला तो वह दूध नहीं देती थी । तो उस समय परिवार के सदस्यों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया लेकिन जब यह घटना निरंतर होने लगी तो उन्होंने उस व्यक्ति को इशारे से समझाकर सांकेतिक क्रिया से अपनी बात रखी की तुम हर रोज दूध कहाँ गायब कर रहे हो। वह बोल नहीं पाने के कारण चुप था तो दूसरे दिन जब पशुओं को जंगल ले गया तो उसने आज सोच लिया की आज में गाय का पीछा करूंगा , तो जब गाय दोपहर के समय भागने लगी तो वह व्यक्ति उसके पीछे पीछे गया उसने देखा कि गाय ढैशर धार में झाड़ियों के बीच दूध दे रही है ( गाय के थन से स्वत: दूध निकलने लगा )यह देखने के बाद उसने सबको बुलाकर इक्कठा किया यह देखने के बाद सब हैरान रह गए तो उन्होंने वहां खुदाई शुरू कर दी ताकि पता लगा सके कि यहां गाय दूध क्यों दे रही है खुदाई करने उन्हें सफलता नहीं मिली क्योंकि जब कुदाली से खुदाई करते तो वह जमीन में लगते ही उल्टी हो जाती बहुत मेहनत करने पर उन्हें एक पत्थर मिला उसके निकालने के बाद वह खुदाई नहीं कर पाये तो वहां ढैशरी नाग जी प्रकट ( आवेश ) हो गये सभी को बताया कि मै इस स्थान पर वास करना चाहता हूँ । यह मेरा प्राकट्य स्थल होगा तो यह कहने पर वहां पर भव्य मंदिर का निर्माण किया गया और तब से अब तक फिर ढैशरी नाग जी को पूजा जाने लगा। बाद में यह मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया और अब वर्तमान समय में मंदिर कमेटी व गांव वालों के सहयोग से 142 वर्षो के लंबे अंतराल के बाद 2019 में मात्र 6 महीने में फिर से भव्य नया मंदिर बनाया गया और ढैशर नाग आज तक यहाँ पूजे जाने लगे ।
मंदिर के भंडारी ,महता श्री संगत राम, श्री लाल चंद ठाकुर तथा मंदिर कमेटी के प्रधान श्री छयाल सिंह वर्मा जी बताते है कि यहां श्री नाग ढैशरी जी पिंङी रूप में विराजमान है। उनके साथ भैरव बाबा, पांच वीर विराजमान है वह बताते है कि श्री ढैशरी नाग जी शोर शराबा बिलकुल नहीं मानते है। उनके साथ यहाँ उनके अनेक गण विराजमान है जिनमें रकसेटा, जल देवता, सिद्ध बाबा, पांच वीर, भैरव बाबा, खडकिखड वीर अठारह वाण, अठारह ठूट, घोषमारी देवी, थना देवता, 64 जोगणी, कनालू वीर, पतालु वीर, नाग माता बूढ़ी नागिन है नाग ढैशरी जी को अलौकिक शक्तियों व गणों का स्वामी माना जाता है। वर्तमान समय में श्री नाग ढैशरी जी च्वासी क्षेत्र के मुख्य पूज्य देवता के रूप में पूजे जाते है ।

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टी सी ठाकुर
कारदार च्वासीगढ़
करसोग मण्डी हिमाचल प्रदेश
tcthakur216@gmail.com
सम्पर्क सूत्र – 8278747306

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