डर शब्द को खुद पर हावी नहीं होने देती : मनीषा मारू

हिमालिनी, अंक मार्च, 2021। मैं मनीषा मारू, विराटनगर (नेपाल) से एक गृहिणी और लेखिका हूँ । शादी से पहले कंप्यूटर की शिक्षिका रह चुकी हूँ । संगीत– नृत्य में भी रुचि रखती हूँ । मेहंदी, स्केचिंग, पेंटिंग, बागवानी ओर सिलाई कर मुझे अलग सी खुशी मिलती है । स्विमिंग का भी शौक रखती हूं । शादी के बाद भी अपने किसी शौक को मुरझाने नहीं दिया जब जो मौका मिलता है कर गुजरती हूँ । स्कूल टाइम से ही लिखती और सिलीगुड़ी के जनपथ समाचार पत्र में छपवाती थी ।
किसी चीज की कोई विशेष शिक्षा नहीं ली । जब भी कुछ करती हूँ परिवार में सभी खुश होते हैं । मेरे जीवन साथी का हर कार्य में पूरा साथ मिलता है तभी हर दायित्व का हर मुश्किलों का निर्वाह आसानी से हो जाता है ।
बच्चों का भी पूरा सहयोग मिलता है, सभी माता–पिता ये चाहते है, उनके बच्चे जीवन में सफलता प्राप्त करें । लेकिन मेरे बच्चे, प्रभु से कामना करते हैं कि उनके माता पिता का हर सपना सच हो । जरूरत पड़ने पर घर बाहर दोनों संभाला है मैने । डर शब्द को खुद पर हावी नहीं होने देती । विपरीत परिस्थितियों को चुनौती के रूप में स्वीकार करने की अब तो आदत ही बन गई । मुश्किलें तो सबके जीवन में आती है और सामना भी दोनों को करना ही पड़ता है । जहां तक अपने हक और सम्मान की बात होती है वहां सबको आजादी है कि वो चाहें लड़कर, चाहें खिलाफ आवाज उठकर अपना हक अवश्य प्राप्त करें । जरूरी नहीं हर बार मसला शांति से ही सुलझ जाए ।
एक छोटा सा संदेश देना चाहूँगी—
हर क्षेत्र, शक्ति आजमाती है नारियाँ
केवल ऑटो रिक्शा ही नहीं चलाती अब तो,
अर्थी को भी कांधा लगाती है नारियाँ
तो फिर क्यों ना संघर्षशील नारी बन
अपना जीवन स्वयं गढ़ो तुम ।
हर एक नए दिन के साथ, नई शक्ति का संचार अपने उर में करो तुम
अदृश्य को दृश्य में परिवर्तित कर, अपना लक्ष्य स्वयं निर्धारित करो तुम ।
विपरीत परिस्थितियों में अगर टूट भी जाओ तो फिर एक नव प्रयास करो तुम,
फिर एक नव प्रयास करो तुम ।
विश्व नारी दिवस की आपको अनन्त शुभकामनाएँ ।

