” कोरोना को जड़ से काटें ” : इन्दु तोदी
” कोरोना को जड़ से काटें “
क्यूँ खाना हार! क्यूँ होना निराश!
रात हो जितनी काली उतना ही होगा प्रकाश,
शिशिर के थपेड़े सह ही रमती बासन्ती सुवास,
मत खोना आश रखना कायम आत्मविश्वास
ताप सहकर ही अंकुराती धर्ती यही है विधान।
आप को आप से ही मिलने का मौका ये महान,
मत समझें मार श्रृष्टा के हम अनमोल उपहार।
जाँच रही प्रकृति हमे कर रही है उपकार,
आएगा सुखद याम धैर्य रखें करें थोड़ा प्रयास।
पाया जो समय बनाएं उसे रमणिय व खास,
हैं सक्षम हम कोरोना का कराएं परलोकवास।
भटक रहे थे , अशान्त निरर्थक मात्र बाहर,
मौका मिला है आज स्वयं के भितर झांकें।
बैठें परिवार बीच, प्रेम घनिष्ठता खुब बढाएं ,
रुखा सुखा जो भी मिलकर खाएं और खिलाएं
जीएं और जीलाएं सुख दुःख आपस मे बाँटे,
आत्मबलकी रेती से कोरोना को जड़ से काटें ।


