राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी द्वारा वर्तमान प्रतिनिधिसभा भंग, कार्तिक २६ और मंसिर ३ गते निर्वाचन की घोषणा

नेपाल के राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी ने मंत्रिपरिषद के निर्णय तथा सिफारिस पर वर्तमान प्रतिनिधिसभा को भंग कर कार्तिक २६ और मंसिर ३ गते दो चरण में निर्वाचन की घोषणा की है। शुक्रवार मध्यरात में बालुवाटार में हुई मन्त्रिपरिषद् बैठक के द्वारा प्रतिनिधिसभा भंग कर मध्यावधि निर्वाचन की घोषणा के लिए राष्ट्रपति के समक्ष सिफारिस किया गया था।
मन्त्रिपरिषद् के सिफारिस के तुरंत बाद राष्ट्रपतिद्वारा प्रतिनिधिसभा भंग तथा चुनाव के तिथि को मंजूरी दे दी गई ही।
राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी ने शुक्रबार रात्रि तक सरकार गठन करने के लिए नेपाली कांग्रेस के सभापति शेरबहादुर देउवा और एमाले अध्यक्ष तथा नेपाल के वर्तमान प्रधान मंत्री केपी शर्मा ओली के द्वारा बहुमत सिद्ध हेतु की गई दाबी अप्रमाणिक कहते हुए किसीको भी प्रधानमन्त्री नियुक्त न करने की निर्णय की थीं। राष्ट्रपति के निर्णय के वाद प्रधानमन्त्री ओली ने प्रतिनिधिसभा विघटन कर नयाँ चुनाव के लिए तिथि घोषणा करते हुए लगभग एक वर्षों से चल रहे राजनीतिक उथलपुथल और अनिर्णय के अवस्था से राष्ट्र को बाहर निकालने का लोकतांत्रिक उपाय के रूप में नए जनादेश के लिए चुनाव में जाने का निर्णय किया है।
इससे पहले प्रधान मंत्री ओली ने पुस ५ गते संसद विघटन कर चुनाव में जाने का निर्णय किए थे। इस निर्णय के विरुद्ध अन्य पार्टियां आंदोलन में उतर आई तो वही सरकार के निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च में दिए गए मुद्दा पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च ने फागुन ११ गते सरकार के निर्णय को बदर कर संसद् पुनःस्थापना कर दिया था।
इस बीच सरकार के द्वारा संसद में विश्वास मत प्राप्त न कर सकना तथा अन्य पार्टियों के द्वारा सरकार बनाने में असमर्थता दिखाने के कारण नेपाली राजनीति में नया तरंग आना स्वाभाविक था। आज संसद विघटन तथा मध्याबधी चुनाव भी उसी कड़ी का नतीजा है।
इन सब के बावजूद विपक्षी दलों द्वारा सरकार के चुनावी घोषणा को सहर्ष स्वीकार करने की मानसिकता नही दिखाई दे रहा है। कानूनी दावपेच तथा राजनीतिक तिकड़म में हार चुके विपक्षियों के चुनावी माहौल भी सुखद नहीं रहनेवाला है। इस बात का डर विपक्षियों को सता रहा है। ओली के आगे इनके सारे योजना विफल होने के कारण सर्वदलीय सरकार अथवा कहें चुनावी सरकार बनाने की विपक्षियों के योजना धारा रहा जाने के कारण देश में आंदोलन होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। कांग्रेस के नेता रमेश लेखक और माओवादी नेता वर्षमान पुन ने राष्ट्रपति के इस कदम का विरोध भी कर दिया है। संभवतः विरोध के स्वर आज मुखर हो के सुनाई दे।

