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राष्ट्रपति का फैसला विवादास्पद, दुर्भाग्यपूर्ण और प्रतिक्रियावादी

नागरिक समाज के नेताओं और संगठनों ने राष्ट्रपति के फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि यह विवादास्पद, दुर्भाग्यपूर्ण और प्रतिक्रियावादी था।

नागरिक समाज के नेताओं ने पांच महीने की अवधि में दूसरी बार प्रधान मंत्री ओली द्वारा प्रतिनिधि सभा को भंग करने का विरोध किया है। नागरिक नेताओं ने माना है कि इसके पीछे गलत मानसिकता है ।

नागरिक नेता अरुणा उप्रेती, कृष्ण प्रसाद पौडेल, पीताम्बर शर्मा, बिंदू शर्मा, दीपेंद्र छेत्री, नारायण ढकाल, महेश मास्की, सुदीप श्रेष्ठ, शरद वंता, श्याम श्रेष्ठ, सोमत घिमिरे और हरि रोका ने शनिवार को इस कदम का विरोध करते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। उन्होंने पूरे नागरिक समाज से भी अपील की है कि वे प्रतिनिधि सभा के विघटन का मुकाबला करने के लिए अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से एकजुट हों और योगदान दें। ह्यूमन राइट्स एंड पीस सोसाइटी ने भी शनिवार को एक बयान जारी कर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव को भंग करने के कदम को दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। आरोप है कि पूरी प्रक्रिया एक षडयंत्रकारी समाज द्वारा रची गई थी। यह खबर दैनिक नागरिक में है।

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