नेपाली टोपी (ढाका टोपी) के विरुद्ध सर्वोच्च में मुद्दा

काठमाडू, १२ जुलाइ । विशेषतः पहाडी खस ब्राह्मण समुदाय और कुछ जनजाति में लोकप्रिय मानेजाने वाले नेपाली ‘ढाका टोपी’ के विरुद्ध सर्वोच्च अदालत में रिट दायर किया गया है । नेपाली नागरिकता का प्रमाणपत्र में रखने वाले फोटो में यह ‘ढाका टोपी’ अनिवार्य रहना चाहिए । यह नियम तो नहीं है, लेकिन वर्षों से चली आ रही अघोषित कानुनी परम्परा है । वर्षों से जारी इस परम्परा को चुनौति दिया है– दाङ जिला सोडियार गाविस निवासी ३३ वर्षीय ज्ञानु अधिकारी ने ।
उन्होंने पहली बार प्राप्त किया हुआ अपना नागरिकता प्रमाणपत्र खो दिया था । और जब वे दूसरी बार लेने के लिए निवेदन दिया, तब उस समय दाङ के प्रमुख जिल्ला अधिकारी लगायत प्रशासनिक अधिकारियों ने ‘ढाका टोपी’ पहना हुआ फोटो रखने के लिए आग्रह किया । उन अधिकारियों ने कहा कि जब तक ‘ढाका टोपी’ वाला फोटो नहीं होगा, तब तक नागरिकता भी नहीं बन पाएगा । उसके बाद अधिकारी ने अपने इस नियम को संविधान विपरित और अपने मौलिक हक विरुद्ध कहते हुए आज शुक्रबार सर्वोच्च में रिट दायर किया है । रिट दायर के लिए अधिवक्ता दीपेन्द्र झा ने सहयोग किया है ।
अधिकारी ने अपने रिट में दावा किया है कि नेपाली ढाका टोपी एक विशेष समुदाय का पहिचान है, लेकिन सभी समुदाय ढाका टोपी नहीं पहनते है । उन्होंने आगे कहा है– ‘ऐसी अवस्था में सभी के लिए यह बाध्यकारी नियम बनाना ठीक नहीं है ।’ उन्होंने यह भी कहा है कि व्यक्तिगत रुप में ढाका टोपी पर अपने कोई भी आग्रह,पूर्वाग्रह नहीं है ।

