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अभिनेता प्राण का निधन , लीलावती अस्पताल में ली अंतिम सांस

 

pranमुम्बई , १२ जुलाइ ।अपने जमाने के जानेमाने खलनायक और चरित्र अभिनेता प्राण का लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार रात मुबई के लीलावती अस्पताल में निधन हो गया। वे 93 वर्ष के थे। उनका पूरा नाम प्राण कृष्ण सिकंद था। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार पिछले कई महीनों से उनकी तबियत खराब थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसमें और गिरावट आ गई थी। प्राण अंतिम संस्कार शनिवार को दोपहर को किया जाएगा।

‘प्राण साहब केवल अभिनेता नहीं एक संस्था …

93 वर्षीय प्राण को भारतीय सिनेमा में 50 सालों से भी ज़्यादा समय तक उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार देने की घोषणा की गई है.

इस मौके पर प्राण के साथ लंबे समय तक काम कर चुके मशहूर चरित्र अभिनेता रज़ा मुराद ने कहा, “प्राण साहब को दादा साहब फाल्के अवार्ड मिला है. यह बात खुशी की भी है और दुख की भी.”उन्होंने कहा, “मुझे खुशी इस बात की है कि उनका जो हक था वो उन्हें आज मिल गया. इस अवार्ड का हकदार आज की तारीख में उनसे ज्यादा कोई नहीं है.”pran_manoj_kumar_bollywood_actor_pti_624x351_pti_nocredit

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वह कहते हैं, “मगर मुझे दुख इस बात का है कि यह अवार्ड मिलने में बहुत देर हो गई है. अगर वे अपने पैरों से चलकर पुरस्कार लेने जा पाते तो खुशी और ज्यादा होती.” रज़ा के अनुसार तो अभिनेता प्राण को यह अवार्ड 25 साल पहले ही मिल जाना चाहिए था.
उन्होंने बताया कि प्राण कई महीने से बिस्तर पर पड़े हैं.पुरस्कार मिलने से जुड़ी अपनी भावनाएं उन्होंने एक शेर के जरिए व्यक्त की.
शेर कुछ यूं था, “कहां थे आप, जमाने के बाद आए हैं. मेरे शबाब जाने के बाद आए हैं.”
सुनहरी यादें
रज़ा मुराद ने इस मौके पर प्राण के साथ जुड़ी कुछ पुरानी यादें भी बीबीसी के साथ साझा की. वे चोरी मेरा काम, चक्कर पर चक्कर, कालिया, राजतिलक, सीतापुर की गीता, तूफान जैसी फिल्मों में प्राण साहब के साथ काम कर चुके हैं.
प्राण के साथ फिल्मों के उस सुनहरे दौर को याद करते हुए रज़ा मुराद कहते हैं, “मैं समझता हूं कि उनके जितना सिन्सीयर, डेडीकेटेड और वक्त का पाबंद कोई इंसान मैंने नहीं देखा. वे मेकअप करके सुबह 9 बजे ही सेट पर आकर बैठ जाते थे.”
उन्होंने आगे बताया, “उस समय स्टूडियो सेंट्रली एअरकंडीशन्ड नहीं होते थे. बहुत गर्मी और उमस होती थी. फिर भी प्राण साहब दाढ़ी मूंछ लगाकर अपने मोटे कॉस्ट्यूम में समय पर सेट पर पहुंच जाते थे. एक शिकन नहीं होती थी, चेहरे पर.”
किरदार जीते थे
रजा मुराद के अनुसार अभिनेता प्राण को यह अवार्ड 25 साल पहले ही मिल जाना चाहिए था. रज़ा मुराद के अनुसार प्राण में काम करने की लगन और शौक बिलकुल 14 साल के बच्चे की मानिंद था. प्राण के बारे में बात करते हुए वे कहते हैं, “वे केवल एक एक्टर नहीं हैं. वे अपने आप में एक इंस्टीच्यूशन हैं.”
उनके अनुसार प्राण ने न केवल बेहतरीन अभिनय किया बल्कि फिल्मों में अपने किरदारों को जिया भी है. रज़ा मुराद को शहीद में प्राण साब का किरदार बहुत पसंद है.  इसके अलावा वे उपकार के ‘मलंग चाचा’ और जंजीर के ‘शेरखान’ के किरदार से बहुत प्रभावित हैं. उनके अनुसार प्राण के 74 साल के करियर में उन्होंने कोई गिरावट नहीं देखी.
उनकी शख्सियत की तारीफ उन्होंने कुछ यूं की, “हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा.“अमरेश द्विवेदी, बीबीसी संवाददाता

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