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रुद्राक्ष जापान और भारत के आपसी सहयोग का प्रतीक, क्या है इसकी खासियत

 

 

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसीवासियों को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के रूप में एक बड़ी सौगात दी है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह जापान और भारत के आपसी सहयोग का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी जापान के राजदूत सुजकी सतोशी भी बने हैं।

सुजकी सतोशी बुधवार को ही अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ वाराणसी पहुंच गए थे और उनकी पत्नी भी साथ में थीं। बाबा शिव की नगरी में बना यह रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर काशी की सांस्कृतिक समृद्धि की झलक प्रस्तुत कर रहा है। 186 करोड़ की लागत से बने कन्वेंशन सेंटर में 108 स्टील के रुद्राक्ष लगाए गए हैं।

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इसकी छत शिवलिंग के आकार की है। पूरी इमारत रात में एलईडी लाइट से जगमग रहती है। यह दोमंजिला केंद्र सिगरा क्षेत्र में 2.87 हेक्टेयर भूमि पर बनाया गया है। इसमें 1,200 लोगों के बैठने की क्षमता है। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की डिजाइन जापान की कंपनी ओरिएंटल कंसल्टेंट ग्लोबल और निर्माण कार्य जापान की ही फुजिता कॉरपोरेशन कंपनी ने किया है। यहां बड़े म्यूजिक कॉन्सर्ट, कॉन्फ्रेंस, नाटक हो सकेंगे और प्रदर्शनियां भी लगेंगी। कुर्सियां विएतनाम से आई हैं। पूरे कन्वेंशन सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। सेंटर को वातानुकूलित रखने के लिए उपकरण इटली से आए हैं।

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यहां एक बड़े हॉल के अलावा 150 लोगों की क्षमता वाला एक मीटिंग हॉल है। इसके अतिरिक्त यहां एक वीआईपी कक्ष, चार ग्रीन रूम भी हैं। गौरतलब है कि 2015 में जब जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे पीएम मोदी के साथ वाराणसी आए थे, तभी इस रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की नींव डाली गई थी। वाराणसी में तैयार इस हाईटेक कन्वेंशन सेंटर का काम साल 2018 में शुरू हुआ था।

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाबा विश्वनाथ के प्रतीक ‘रुद्राक्ष’ की प्रतिकृति तथा भारत व जापान के मैत्री का यह केंद्र ‘रुद्राक्ष’ कन्वेंशन सेंटर अपनी अद्भुत वास्तु के लिए जाना जाएगा। मैं प्रधानमंत्रीजी और जापान के माननीय राजदूत व उनके साथ आए हुए दूतावास के सभी अधिकारियों का हृदय से अभिनंदन करता हूं।

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