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प्रथम शैलपुत्री, माता का आगमन पालकी पर,प्राकृतिक आपदा और राजनीतिक उथल-पुथल की संभावना

 

इस वर्ष माता डोली पर बैठ कर आ रही है जिसके कारण प्राकृतिक आपदा और राजनीतिक उथल-पुथल की संभावना बनी रहेगी  कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त है जो दिन में 11:36 से 12:24 तक रहेगा। इस बार नवरात्र 9 की बजाय आठ ही दिनों के होंगे। इसका कारण यह है की चतुर्थी और पंचमी तिथि एक साथ पड़ रही है। दशहरा 15 अक्टूबर को मनाया जाएगा। नवरात्र सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए विशेष शुभ होता है। नवरात्र की शुरुआत चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में होगी इसलिए घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त में करना श्रेष्ठ रहेगा। नवरात्र में चार बार रवि योग बनेगा। यह योग उन्नति और समृद्धि देता है। नवरात्र में भवन, भूमि, वाहन, आभूषण, वस्त्र, रत्न सभी प्रकार की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। चतुर्थी और पंचमी एक साथ होने से कुष्मांडा माता और स्कंदमाता की आराधना एक साथ होगी।

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डोली में सवार होकर आने से महिलाओं का वर्चस्व बढ़ेगा और मान सम्मान में वृद्धि होगी। शुक्रवार को ब्रह्मचारिणी, शनिवार को मां चंद्रघंटा, रविवार को मां कुष्मांडा और मां स्कंदमाता ,सोमवार को कात्यायनी, मंगलवार को मां कालरात्रि ,बुधवार को मां महागौरी ,गुरुवार को मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी। शुक्रवार 15 अक्टूबर को नवरात्रि व्रत का पारण और दशहरा मनाया जाएगा ।श्री पांडे ने बताया कि मां जब डोली पर सवार होकर आती है तो भारत में ही नहीं पूरे विश्व में राजनीतिक उथल-पुथल होने की संभावना बनी रहती है। माता का डोली पर आना शुभ संकेत नहीं माना जाता लेकिन माता का प्रस्थान हाथी पर होगा जो शुभ माना गया है। बारिश की संभावना बढ़ेगी। आस्था, भक्ति और विश्वास के साथ मां की आराधना करने वालों की मनोकामना अवश्य पूरी होगी।

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